नेपाल के रसुवागढ़ी में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। इसी इलाके से महज दो दिन पहले रीवा के ओम द्विवेदी कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे थे। ओम ने बताया कि जिस होटल में उन्होंने ठहरकर खाना खाया और जिस इमिग्रेशन सेंटर पर जांच कराई थी, वहां अब मलबा और पानी नजर आ रहा है।
ऊपर से लुढ़कता आया पत्थर
ओम ने अपनी यात्रा का अनुभव बताते हुए कहा कि रास्ते में अचानक पहाड़ से एक बड़ा पत्थर उनकी तरफ लुढ़कता हुआ आया। उनके साथ मौजूद यात्रियों की सांसें थम गईं। ओम के मुताबिक, भगवान महादेव की कृपा से पत्थर त्रिशूली नदी में जा गिरा। उन्होंने कहा कि उस पल उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्होंने मौत की आवाज सुन ली हो।
रायसेन के दो युवक भी लापता
इसी इलाके में काम कर रहे मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दो युवक 26 अगस्त से लापता हैं। सुल्तानपुर तहसील के मंजूस निवासी विशेष राजपूत और मंडीदीप निवासी हिमांशु शाक्या अपर त्रिशूली-1 हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। परिवार के मुताबिक दोनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
12 अगस्त को काठमांडू से शुरू हुई यात्रा
ओम के अनुसार, 12 अगस्त को 20 भारतीय यात्रियों और चार नेपाली सदस्यों का दल काठमांडू से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुआ था। शाम करीब 7 बजे दल रसुवागढ़ी पहुंचा। वहां नेपाली गाइड पेम्बा शेरपा ने आगे पहाड़ धंसने की जानकारी दी।
पत्थर गिरने के बीच पैदल पार किया रास्ता
ओम ने बताया कि सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद थी और जगह-जगह पहाड़ से छोटे पत्थर गिर रहे थे। इसके बाद दल के सदस्य वाहन से उतरे और पैदल रास्ता पार कर बॉर्डर तक पहुंचे। अगले दिन इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी तिब्बत की ओर रवाना हुए।









