टांडा पुलिस आवास निर्माण में लापरवाही पर एक और कार्रवाई

प्रभारी एक्सईएन का अतिरिक्त प्रभार छिना- 14 करोड़ के 40 टाइप-बी आवासों में मिली थीं निर्माण संबंधी खामियां

अंबेडकरनगर। टांडा कोतवाली परिसर में करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 40 टाइप-बी आवासों के निर्माण में सामने आई खामियों पर कार्रवाई का सिलसिला जारी है। दो अवर अभियंताओं और सहायक अभियंता के निलंबन के बाद अब शासन ने प्रभारी अधिशासी अभियंता शैलेंद्र चौधरी से अंबेडकरनगर प्रखंड का अतिरिक्त कार्यभार भी वापस ले लिया है। शासन ने इसे शासकीय हित में लिया गया निर्णय बताया है।

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के उप सचिव फूलचंद यादव की ओर से जारी आदेश के अनुसार शैलेंद्र चौधरी को तीन जुलाई 2025 से अस्थायी व्यवस्था के तहत सिद्धार्थनगर के साथ अंबेडकरनगर प्रखंड का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। अब यह अतिरिक्त जिम्मेदारी समाप्त कर दी गई है।

निरीक्षण में खुली निर्माण की परतें

नौ सितंबर को विभाग के निदेशक एवं मुख्य अभियंता आरके वर्मा ने टांडा कोतवाली परिसर में निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण किया था। इस दौरान निर्माण कार्य में कई कमियां सामने आईं। आरसीसी में इस्तेमाल सीमेंट-कंक्रीट की कंप्रेसिव स्ट्रेंथ की निर्धारित फ्रीक्वेंसी पर जांच नहीं कराई गई थी।

निर्माण में इस्तेमाल अन्य सामग्री के परीक्षण में भी लापरवाही मिली। इतना ही नहीं, अप्रैल के बाद गुणवत्ता और निर्माण प्रगति से संबंधित पंजिकाओं में प्रविष्टियां भी नहीं की गई थीं। निरीक्षण के दौरान मिली इन कमियों को निर्माण कार्य की निगरानी में गंभीर चूक के तौर पर देखा गया।

पहले जेई और फिर एई पर हुई कार्रवाई

निरीक्षण के बाद विभाग ने टांडा के जेई मनीष पटेल और आलापुर के जेई अरुण मौर्या को निलंबित कर दिया। इसके बाद सहायक अभियंता वीरेंद्र कुमार पांडेय को भी निलंबित करते हुए विभागीय जांच शुरू की गई।

प्रभारी अधिशासी अभियंता शैलेंद्र चौधरी से भी पूरे मामले में 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अब शासन ने अंबेडकरनगर प्रखंड का उन्हें दिया गया अतिरिक्त कार्यभार समाप्त कर दिया है।
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