नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में नाबालिगों से गैंगरेप की तीन घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक अपराधी के मन में मौत का डर नहीं होगा, तब तक इस तरह के अपराधों पर रोक लगाना मुश्किल होगा। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहने और ऐसे मामलों में प्रभावी एवं सख्त कार्रवाई करने की जरूरत बताई।
जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने दिल्ली पुलिस से कहा कि जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने से हिचकिचाना नहीं चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों को अपराधों की गंभीरता को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाने की बात कही।
पुलिस को कर्तव्य निभाने की हिदायत
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ लोग कार्रवाई पर अनुच्छेद 21 और मानवाधिकारों का हवाला देकर सवाल उठा सकते हैं। हालांकि, पुलिस को कानून के दायरे में रहते हुए अपना कर्तव्य निभाना होगा।
बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल नियमों और योजनाओं को कागज पर दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है। अपराधों की रोकथाम और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
दिल्ली-NCR की तीन घटनाओं पर स्वत: संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 4 अगस्त से 21 सितंबर के बीच हुई नाबालिगों से रेप की तीन घटनाओं का स्वत: संज्ञान लिया था। इनमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस, आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर में हुई घटनाएं शामिल हैं।
इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने मामले को अपने स्तर पर लिया और पुलिस तथा संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। मामले में पहली सुनवाई 28 सितंबर को हुई थी।
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दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय से चार हफ्ते में जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम और महिलाओं एवं नाबालिगों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय को अपनी कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी अदालत के समक्ष रखनी होगी।









