हिंदी सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री रेखा की जिंदगी पर्दे पर दिखने वाली चमक-दमक से कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव भरी रही है। बचपन में पिता से दूरी, परिवार की आर्थिक परेशानियां और शुरुआती करियर में आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं, उनकी निजी जिंदगी भी लंबे समय तक सुर्खियों में रही। जन्मदिन के मौके पर जानिए रेखा के जीवन के पांच ऐसे अध्याय, जिन्होंने उनके सफर को खास बनाया।
1. बचपन में पिता का साथ नहीं मिला
रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को चेन्नई में हुआ था। उनका असली नाम भानुरेखा गणेशन है। वह दक्षिण भारतीय अभिनेता जैमिनी गणेशन और अभिनेत्री पुष्पावल्ली की बेटी हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बचपन में उन्हें पिता का अपेक्षित साथ नहीं मिला। परिवार की आर्थिक परेशानियों के बीच कम उम्र में ही उन्हें फिल्मों में काम करना पड़ा। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘रंगुला रत्नम’ में बाल कलाकार के रूप में काम किया।
2. शुरुआती करियर में झेलनी पड़ी आलोचना
रेखा ने 1960 के दशक में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की और बाद में हिंदी सिनेमा का रुख किया। शुरुआती दौर में उनके लुक, वजन और हिंदी बोलने के तरीके को लेकर आलोचनाएं हुईं। हालांकि, उन्होंने अपनी भाषा, व्यक्तित्व और अभिनय पर मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय ने दर्शकों का ध्यान खींचा। यह बदलाव उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ।
3. विनोद मेहरा से शादी की चर्चाएं
रेखा और अभिनेता विनोद मेहरा के रिश्ते को लेकर लंबे समय तक चर्चाएं होती रहीं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दोनों की शादी का दावा भी किया गया, लेकिन इस संबंध को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। इसलिए इसे निर्विवाद तथ्य के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। रेखा की निजी जिंदगी से जुड़ा यह प्रसंग आज भी फिल्मी दुनिया के चर्चित किस्सों में शामिल है।
4. अमिताभ बच्चन के साथ रिश्ते की चर्चाएं
रेखा और अमिताभ बच्चन ने ‘दो अनजाने’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘सिलसिला’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया। पर्दे पर उनकी जोड़ी को दर्शकों ने पसंद किया। दोनों के कथित रिश्ते को लेकर भी दशकों तक मीडिया में अटकलें लगती रहीं, लेकिन इस बारे में सार्वजनिक रूप से सामने आई बातों और अफवाहों के बीच अंतर करना जरूरी है। इन चर्चाओं के बावजूद रेखा की पहचान सिर्फ उनके निजी जीवन तक सीमित नहीं रही।
5. पति मुकेश अग्रवाल की मौत के बाद मुश्किल दौर
साल 1990 में रेखा ने कारोबारी मुकेश अग्रवाल से शादी की थी। शादी के कुछ समय बाद मुकेश अग्रवाल की आत्महत्या की खबर सामने आई। उस घटना के बाद रेखा को मीडिया की तीखी चर्चाओं और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उनकी निजी जिंदगी पर सवाल उठे, लेकिन इस कठिन दौर के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई और अपनी फिल्मी पहचान बनाए रखी।
‘उमराव जान’ से अभिनय को मिली नई पहचान
रेखा की जिंदगी में मुश्किलें भले ही आती रहीं, लेकिन उनका फिल्मी सफर लगातार आगे बढ़ा। ‘घर’, ‘खूबसूरत’, ‘उमराव जान’, ‘इजाजत’ और ‘खून भरी मांग’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहना मिली। फिल्म ‘उमराव जान’ में शानदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
रेखा का सफर इस बात की मिसाल है कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसकी निजी जिंदगी की चर्चाओं से नहीं, बल्कि उसके काम और प्रतिभा से भी बनती है। पांच दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी ऐसी जगह बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है।









