नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हिंदू धर्म से किसी गैर-हिंदू धर्म को अपनाने वाला व्यक्ति केवल अपने पुराने सामाजिक दर्जे के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मांग सकता। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
सरकारी आदेश को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
दरअसल, सरकार ने 9 मार्च 2024 को पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों को इस्लाम अपनाने के बाद मुस्लिम पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की अनुमति दी थी। इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने सरकारी आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
अनुच्छेद 16(4) का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर-हिंदू धार्मिक व्यवस्था में जाने वाला व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत केवल अपने पुराने सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई का दावा नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा।









