नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्तावित कानून को फिलहाल रोक दिया है। शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रम्प ने कहा कि यह कदम अमेरिका के हित में है। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इससे भारत और चीन समेत कई देशों के व्यापार पर असर पड़ सकता था।
भारत और चीन पर भी पड़ सकता था असर
प्रस्तावित प्रतिबंधों के दायरे में रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों को लाने की योजना थी। इनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों के नाम शामिल थे। कानून लागू होने पर इन देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता था। फिलहाल कानून को रोकने के फैसले से इस प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई टल गई है।
रूस की कमाई रोकना था मकसद
इस कानून का उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को सीमित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए रूस को धन जुटाने में मुश्किल हो। अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रतिबंधों का इस्तेमाल करता रहा है। प्रस्तावित कानून के जरिए रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर भी दबाव बनाने की योजना थी।
ट्रम्प के फैसले पर चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने से जुड़ी डील भी की थी। ऐसे में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोकने के फैसले पर चर्चा हो रही है। हालांकि, कानून को रोकने के पीछे ट्रम्प ने अमेरिका के हितों को वजह बताया है। कानून को फिलहाल रोकने का अर्थ यह नहीं है कि रूस से जुड़े सभी अमेरिकी प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं।









