अल नीनो का असर: दक्षिण-पश्चिम भारत में सूखे का संकट, फसलें बर्बाद

कर्नाटक के 226 तालुके सूखाग्रस्त, कावेरी डेल्टा में धान की खेती का रकबा एक लाख एकड़ से ज्यादा घटा

नई दिल्ली। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में अल नीनो के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। कमजोर मानसून के कारण दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में जलाशयों का जलस्तर गिरने और सूखे जैसी स्थिति बनने की खबरें हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में पानी की कमी से खेती प्रभावित हो रही है। इसका असर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

कर्नाटक में 226 तालुके सूखाग्रस्त

कर्नाटक में 240 में से 226 तालुकों को सूखाग्रस्त बताया गया है। राज्य में करीब 33 प्रतिशत फसल बर्बाद होने का अनुमान है। बारिश की कमी और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ी हैं। फसलों को नुकसान होने से कृषि आय पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

तमिलनाडु में धान की खेती का रकबा घटा

तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में पानी की कमी का असर धान की खेती पर पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, धान की खेती का रकबा एक लाख एकड़ से ज्यादा घट गया है। पैदावार प्रभावित होने के कारण चावल की कुछ किस्मों की कीमतों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात कही गई है।

धान की खेती में कमी और उत्पादन प्रभावित होने से किसानों के साथ-साथ चावल के बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

महाराष्ट्र में फसलें सूखने से किसान परेशान

महाराष्ट्र में बारिश की कमी और फसलों को हुए नुकसान के बीच किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की बात सामने आई है। दी गई जानकारी के अनुसार, सात दिनों में चार किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। फसल खराब होने, कर्ज चुकाने और खेती की लागत निकालने की चुनौतियां किसानों की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

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