सरकारी विभागों में नौकरी के नाम पर ठगी, तीन गिरफ्तार

लखनऊ: बेरोजगारों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश एसटीएफ ने मंगलवार को किया। इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें सचिवालय में तैनात अधिकारी का निजी सचिव भी शामिल है। एसटीएफ की टीम ने आरोपियों के पास से कूटरचित नियुक्ति पत्र, सचिवालय पास सहित कई अहम दस्तावेज हासिल किये हैं। पुलिस के मुताबिक सचिवालय का निजी सचिव अपने कमरे में बेरोजगारों से इंटरव्यू लेता था। इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

यह भी पढ़े: प्राविधिक शिक्षा बोर्ड के सचिव व निदेशक हटाए गए

एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह के मुताबिक पकड़े गये आरोपियों में नटखेड़ा आलमबाग का रहने वाला सचिवालय के अधिकारी का निजी सचिव विजय कुमार मंडल, मूलरूप से महराजगंज के सिसवां व लखनऊ में गुडंबा के सावित्रीपुरम का रहने वाला धर्मवीर सिंह उर्फ अजय सिंह उर्फ धीरू और दिल्ली के स्वरूपनगर बीकानेर स्वीट्स के पास का आकाश कुमार शामिल हैं। धर्मवीर पर कानपुर देहात पुलिस ने 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है। टीम ने आरोपियों के पास से 6 मोबाइल, कूट रचित सचिवालय का एक सहायक समीक्षा अधिकारी का पहचान पत्र, 8 नियुक्ति पत्र, 22 बेरोजगारों के शैक्षिक प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैनकार्ड, एटीएम, नकदी बरामद किया।

यह भी पढ़े:  मऊ सदर विधायक अब्बास अंसारी भगोड़ा घोषित

नाम बदलकर करता था ठगी

एसटीएफ के मुताबिक धर्मवीर ने पूछताछ में कुबूल किया यिका वह अपना नाम बदलकर लोगों से संपर्क करता था। अजय सिंह नाम से मैने फर्जी आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व सचिवालय का पहचान पत्र भी बनवाया है। धर्मवीर के खिलाफ हरदोई के देहात कोतवाली में मुकदमा दर्ज है। जिसमें वारंट भी है। इसी मामले में पुलिस अधीक्षक हरदोई ने 10 हजार का इनाम भी घोषित किया है।

सचिवालय के कमरे में लेता था इंटरव्यू

पूछताछ में विजय ने बताया कि उसकी मुलाकात धर्मवीर सिंह से वीवीआईपी गेस्ट हाउस बंदरियाबाग में हुई थी। वहीं से दोनों संपर्क में आये। धर्मवीर ने कहा कि कुछ बेरोजगारों को नौकरी का झांसा देकर उनके पास लेकर आयेगा। उनका इंटरव्यू अपने कमरे में एक-एक कर बुलाकर लेना। फिर उनको हम फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर मोटी रकम हासिल कर लेंगे। धर्मवीर धीरे-धीरे कर करीब 70 बेरोजगारों को लेकर उसके कार्यालय पहुंचा। जहां पर सभी का इंटरव्यू लिया गया। सभी के शैक्षिक प्रमाण पत्र जमा करा लिया गया। इंटरव्यू होने के बाद धर्मवीर ने बेरोजगारों को कूटरचित नियुक्ति पत्र प्रिंट कराकर दिया। जो नियुक्ति पत्र का फार्मेट सचिवालय की तरह था। उसका नमूना विजय ने ही उपलब्ध कराया था। विजय ने बताया कि उसके ऊपर एक ठेकेदार का 35-40 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। जिसे देने के लिए रुपये का इंतजाम करना था। इसी लिए धर्मवीर व आकाश के साथ काम करता था।

विजय ने बनवाया था सचिवालय का पहचान पत्र

एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक विजय ने कुबूल किया किया उसने ही आकाश व धर्मवीर सिंह का सहायक समीक्षा अधिकारी का पहचान पत्र बनवाया था। जिस पर सचिवालय के अधिकारी के हस्ताक्षर थे। इन्टरव्यू के बाद विजय धर्मवीर सिंह से प्रिंट किया हुआ नियुक्ति पत्र मंगवाता था और उस पर हस्ताक्षर करके उसे रजिस्ट्री के माध्यम से संबंधित अभ्यर्थी के पते पर भिजवा देता था। फर्जीवाड़े की जानकारी बेरोजगारों को तब होती थी जब वह सचिवालय में ज्वाइन करने पहुंचते थे। वहां सचिवालय कर्मियों द्वारा बताया गया कि यह नियुक्ति-पत्र फर्जी हैं। इस प्रकार की नियुक्ति से संबंधित कोई विज्ञप्ति यहां से जारी नहीं की गयी है। जिसके बाद इनके द्वारा उपरोक्त फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गयी थी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button