लखनऊ आश्रय गृह में 5 बच्चों की संदिग्ध मौत

  • मौत की वजह अज्ञात, प्रशासन अब भी सवालों के घेरे में
  • जांच के बावजूद कोई दोषी नहीं, मासूमों की मौत पर सन्नाटा
  • स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली, लापरवाही का कोई जवाब नहीं
  • सरकारी आदेश तो जारी, लेकिन कार्रवाई अब भी अधूरी
  • पानी की रिपोर्ट क्लियर, फिर कैसे फैली यह जानलेवा बीमारी?

लखनऊ। लखनऊ के मोहान रोड स्थित निर्वाण आश्रय केंद्र में 21 से 26 मार्च के बीच पांच दिव्यांग बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी या संस्था की जवाबदेही तय नहीं हो सकी है। प्रशासन ने जांच तो शुरू की, लेकिन मौत की असली वजह अभी भी अनसुलझी बनी हुई है। सवाल उठ रहा है कि सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगी या यह घटना भी महज एक फाइल बनकर रह जाएगी।

जांच हुई, लेकिन नतीजा शून्य

जांच के लिए एसडीएम सरोजनी नगर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई थी। पानी और सेफ्टी टैंक के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, लेकिन 10 दिन बाद आई रिपोर्ट में कोई ठोस वजह सामने नहीं आई। पहले फूड प्वाइजनिंग और कीड़े वाली उल्टी के कारण मौत की आशंका जताई गई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी।

स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही उजागर

  • आश्रय गृह में कोई एलोपैथिक डॉक्टर तैनात नहीं था, बच्चों का इलाज होम्योपैथिक डॉक्टर से करवाया जा रहा था।
  • स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि एमबीबीएस डॉक्टर की अनुपस्थिति में उपचार में देरी हुई।
  • 147 बच्चों वाले इस केंद्र को सरकार से करोड़ों रुपये की मदद मिलती है, लेकिन देखरेख में गंभीर लापरवाही पाई गई।

सरकारी सख्ती के दावे, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं

लखनऊ डीएम विशाख जी ने एफएसडीए को सभी संरक्षण गृहों में खाद्य लाइसेंस अनिवार्य करने और मेस में सुधार के निर्देश दिए हैं। रसोइयों को हाइजीन का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। लेकिन आश्रय गृह के अफसरों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

पानी की रिपोर्ट क्लियर, लेकिन बीमारी का कारण अज्ञात

  • बच्चों की मौत के बाद लिए गए पानी के पांच नमूने जांच में सुरक्षित पाए गए।
  • स्वास्थ्य विभाग ने सात और नमूने लिए, लेकिन वे भी क्लियर हो गए।
  • सवाल बना हुआ है कि बीमारी फैली कैसे और बच्चों की जान क्यों गई?

अस्पताल में इलाजरत बच्चे और बढ़ता डर

सरकारी अस्पतालों में भर्ती 7 बच्चों को डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन 5 बच्चे अब भी इलाजरत हैं। बलरामपुर अस्पताल और केजीएमयू में भर्ती बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है।

प्रशासन पर सवाल: मासूमों की मौत लेकिन कोई दोषी नहीं?

यह घटना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है। न तो बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय हुई, न ही संस्थान के कुप्रबंधन पर कोई ठोस कदम उठाया गया। मासूमों की जान चली गई, लेकिन कोई जवाबदेही लेने को तैयार नहीं।

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