
- वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर मसूद का एतराज
- यह विधेयक अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला” – इमरान मसूद
- काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड की तुलना कर मसूद ने उठाए सवाल
- सरकार ने वक्फ संपत्तियों को लेकर बनाई नई नीति, विपक्ष ने जताई आपत्ति
- संविधान के खिलाफ और धार्मिक आज़ादी पर खतरा – मसूद का बयान
नई दिल्ली। 02 अप्रैल 2025: सहारनपुर के सांसद और कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस विधेयक को सहिष्णुता और विविधता के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह संविधान को कमजोर करने वाला कदम है। मसूद ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ाने का निर्णय अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर सीधा हमला है।
विधेयक को लेकर इमरान मसूद के गंभीर आरोप
इमरान मसूद ने दावा किया कि वक्फ बिल का ड्राफ्ट तैयार करने वाले ज्यादातर लोगों को इसकी बुनियादी समझ भी नहीं थी। उन्होंने कहा, “90 प्रतिशत लोग यह भी नहीं बता सकते कि पाकी और नापाकी क्या है। मुसलमान ही अपनी धार्मिक आवश्यकताओं को समझ सकते हैं। लेकिन सरकार ने इस विधेयक के जरिए वक्फ बोर्ड के प्रबंधन को अपने नियंत्रण में ले लिया है।”
काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड की तुलना
इमरान मसूद ने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा, “काशी विश्वनाथ ट्रस्ट में किसी मुसलमान को सदस्य नहीं बनाया जाता, लेकिन वक्फ बोर्ड में 12 गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की जा रही है। यह सरकार की दोहरी नीति को उजागर करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान कानूनों के अनुसार, यदि काशी विश्वनाथ ट्रस्ट का प्रशासक कोई मुस्लिम अधिकारी होता है, तो उसे पद से हटाकर किसी अन्य को नियुक्त कर दिया जाता है।
वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर उठाए सवाल
इमरान मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि नए विधेयक के तहत वक्फ की विवादित संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में लेने का प्रावधान है। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में 1.15 लाख हेक्टेयर वक्फ संपत्तियों को सरकार ने विवादित घोषित कर दिया है। अब नए कानून के मुताबिक, जब तक विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक इन संपत्तियों पर सरकार का ही अधिकार बना रहेगा। इससे अतिक्रमणकारियों को खुली छूट मिल जाएगी।”
विपक्ष की सरकार को चेतावनी
इमरान मसूद ने सरकार से मांग की कि यह विधेयक संसदीय समिति को भेजा जाए और उस पर विस्तृत चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला नहीं, बल्कि देश की धर्मनिरपेक्षता पर भी खतरा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस विधेयक के खिलाफ संसद से लेकर सड़कों तक संघर्ष करेंगे।
सरकार की स्थिति स्पष्ट नहीं
केंद्र सरकार ने इस मामले पर स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराने की रणनीति बना रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है।








