
- पूर्व विधायक से जुड़ी कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही एजेंसी
- कई शहरों में एक साथ छापे, दस्तावेज और डिजिटल डाटा जब्त
- बैंक लोन के गलत इस्तेमाल की जांच में जुटी प्रवर्तन एजेंसी
लखनऊ। प्रवर्तन एजेंसी ने सोमवार को एक पूर्व विधायक से जुड़ी कंपनियों और कार्यालयों पर समन्वित कार्रवाई की। छापेमारी लखनऊ, गोरखपुर और मुंबई के कई ठिकानों पर की गई। यह कार्रवाई एक निजी फर्म और उससे जुड़ी इकाइयों के विरुद्ध की गई है, जिन पर वित्तीय संस्थानों से मिली धनराशि के दुरुपयोग का आरोप है।
तीन शहरों में एक साथ छापेमारी
जांच एजेंसी ने संबंधित परिसरों से महत्वपूर्ण कागजात, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन कंपनियों पर छापे मारे गए, वे कई बैंकों से मिले ऋण का इस्तेमाल परियोजनाओं के बजाय अन्य निवेशों में कर रही थीं।
गोरखपुर में एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार के आवास पर भी जांच टीम ने दस्तक दी। यह कार्रवाई सुबह से ही शुरू हो गई थी और देर शाम तक जारी रही।
बैंक धोखाधड़ी से मनी लॉन्ड्रिंग तक का मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनियों ने करोड़ों रुपये के लोन लेकर उन्हें परियोजनाओं में लगाने के बजाय अन्य जगह स्थानांतरित कर दिया, जिससे बैंकों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।
पहले इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने बैंक की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी। उसके बाद प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज किया
पूर्व विधायक से जुड़ा है मामला
जिन कंपनियों की जांच हो रही है, वे एक पूर्व मंत्री के पुत्र और पूर्व विधायक से जुड़ी बताई जा रही हैं। इससे पहले भी ये कंपनियां कई बार चर्चा में रह चुकी हैं। वर्ष 2023 में एक प्रमुख बैंक ने 200 करोड़ से अधिक की राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। तभी से संबंधित कारोबारी समूह निगरानी में था।








