
- वर्दीधारी सिपाही का दर्द: क्या हमें सही मानसिक सहायता मिल रही है?
- क्या अरविंद यादव की आत्महत्या सिर्फ एक दुर्घटना थी, या इसके पीछे कुछ और था?
- जीवन के अनकहे पहलू: जब एक कर्तव्यनिष्ठ सिपाही चुपचाप अपनी जिंदगी को खत्म करता है
अम्बेडकरनगर। जैतपुर थाना क्षेत्र के मढ़वरपुर पुरवा मुस्तफाबाद गांव में रविवार शाम एक अमरूद के पेड़ की डाल पर फंदे से लटकता हुआ शव पाया गया। मृतक 46 वर्षीय अरविंद यादव, जो कई वर्षों से होमगार्ड के रूप में अपनी कर्तव्यनिष्ठा से सेवा दे रहे थे, अब अपनी ही जिंदगी को समाप्त कर चुके थे।
परिवार में कोहराम
अरविंद यादव का शव उनके घर के पास एक अमरूद के पेड़ की डाल पर फंदे से लटकते हुए पाया गया। घटना के समय उनकी पत्नी और बड़ा बेटा बाजार गए हुए थे। जब वे घर लौटे तो अरविंद का कहीं पता नहीं चला। परिजनों द्वारा खोजबीन करने पर उनका शव पेड़ से लटका हुआ मिला। यह दृश्य पूरे परिवार और गांव के लिए अपूरणीय शोक का कारण बना।
मृतक द्वारा छोड़ा गया पत्र
अरविंद के शव के पास एक पत्र मिला, जिसमें लिखा था, “मेरी मौत के लिए मेरा परिवार जिम्मेदार नहीं है। यह मेरा अपना फैसला है। मेरे परिवार को इस दर्द के लिए दोष न दिया जाए।” इस पत्र ने परिवार और गांव वालों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया कि क्या मानसिक तनाव या अन्य किसी कारण ने अरविंद को इस कदम तक पहुंचाया।
पुलिस कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही जैतपुर थाना अध्यक्ष वंदना अग्रहरि दल बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना अध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
प्रश्न और शोक
अरविंद के बच्चों के मासूम सवाल अब अनुत्तरित रह गए हैं, “पापा कब आएंगे?” उनका चेहरा अब हमेशा अपने पिता की वर्दी की यादों से भरा रहेगा, लेकिन वह पिता अब कभी उन्हें गोदी में नहीं उठाएंगे, न ही उनके साथ बात करेंगे।
निष्कर्ष
अरविंद यादव की आत्महत्या की घटना ने न केवल उनके परिवार को झकझोर दिया, बल्कि पूरे गांव में गहरी चिंता और शोक का माहौल बना दिया। क्या यह आत्महत्या थी, या फिर कुछ और कारण थे जो उनके अंदर के दर्द को बाहर न निकलने दिया? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।








