
- कैसे हुआ था अवैध कब्जा?
- प्रशासन की लापरवाही ने बढ़ाई मुश्किलें
- संतराम मौर्य की अथक लड़ाई
अम्बेडकरनगर। शाहपुर औरांव ग्राम पंचायत की 80 बीघा से अधिक तालाब भूमि, जो वर्षों से अवैध कब्जे में थी, जल्द ही ग्राम सभा को वापस मिल सकती है। गाटा संख्या 600 के रूप में दर्ज यह सरकारी जमीन कुछ कथित किसानों द्वारा फर्जी पट्टों और गलत प्रविष्टियों के जरिए हड़प ली गई थी।
फर्जी दावों के सहारे हुआ था अतिक्रमण
तालाब की यह जमीन ग्राम सभा की साझा संपत्ति थी, लेकिन कुछ लोगों ने इसे निजी खेत में तब्दील कर दिया। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस मामले में गांव के संतराम मौर्य ने तहसील स्तर पर मुकदमा दायर किया और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए जमीन को तालाब के रूप में बहाल करने की मांग की।
कई सालों तक चली कानूनी लड़ाई
संतराम मौर्य की याचिका को कई बार टाला गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जब उच्च न्यायालय में भी सुनवाई धीमी रही, तो उन्होंने न्यायालय की अवमानना याचिका दायर कर दी। अब उच्च न्यायालय ने इस मामले को 23 अप्रैल तक निपटाने का निर्देश उपजिलाधिकारी (न्यायिक) को दिया है।
जल्द मुक्त होगी ग्राम सभा की जमीन
ग्राम सभा के सरकारी अधिवक्ता मौर्य ने बताया कि तालाब की जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा चला आ रहा था। न्यायालय में सभी साक्ष्य पेश किए जा चुके हैं और सुनवाई अंतिम चरण में है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह जमीन ग्राम सभा के कब्जे में लौट आएगी।
यह मामला सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की सुनियोजित साजिश और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी साझी विरासत बहाल होगी।








