
- दिल्ली-NCR में 60 लाख से ज्यादा पुरानी गाड़ियां चल रही हैं
- सरकार को रिमोट सेंसिंग तकनीक पर 3 महीने में स्टडी पूरी करने का निर्देश।
- फास्टैग सिस्टम की वजह से टोल प्लाजा पर निगरानी में परेशानी हो रही है
नई दिल्ली। दिल्ली और NCR क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह 30 अप्रैल तक यह प्रस्ताव पेश करे कि कैसे सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को लागू किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने इस संबंध में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी से सरकार का रुख पूछा।
ASG ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि दिल्ली में 60 लाख से ज्यादा पुरानी गाड़ियां चल रही हैं, जिनकी उम्र सीमा पार कर चुकी है। इसके अलावा NCR क्षेत्र में ऐसी गाड़ियों की संख्या करीब 25 लाख है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए पुरानी गाड़ियों की संख्या पर निर्णय लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि केंद्र तीन महीने के भीतर रिमोट सेंसिंग तकनीक के इस्तेमाल पर एक स्टडी पूरी करे। यह तकनीक सड़क पर चलती गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए जरूरी मानी जा रही है। हालांकि, सरकार ने इसे पूरा करने के लिए 10 से 12 महीने का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
इसके अलावा, ASG भाटी ने बताया कि पहले टोल प्लाजा पर वाहनों की निगरानी की जाती थी, लेकिन अब फास्टैग सिस्टम के चलते वाहन बिना रुके निकल जाते हैं, जिससे डेटा एकत्र करना मुश्किल हो गया है।









