
- हिमांशी नरवाल की अपील – आतंक के खिलाफ एकजुट हो देश, नफरत नहीं चाहिए
- शहीद विनय नरवाल की पत्नी ने दी इंसानियत की मिसाल, बोलीं – मुस्लिमों से कोई बैर नहीं
- “न्याय चाहिए, नफरत नहीं” – आतंकी हमले में पति को खो चुकी हिमांशी की भावुक अपील
करनाल। पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल ने गुरुवार को देशवासियों से शांति और सद्भाव की अपील की। विनय के जन्मदिन पर आयोजित रक्तदान शिविर के दौरान हिमांशी ने कहा, “हम न्याय चाहते हैं, नफरत नहीं। जिन लोगों ने गलत किया है, उन्हें सजा मिलनी चाहिए, लेकिन मुस्लिम और कश्मीरियों के खिलाफ नफरत फैलाना गलत है।”
हिमांशी और परिवार की अहम बातें:
1. हम सिर्फ शांति चाहते हैं, किसी और के साथ ऐसा न हो
हिमांशी ने कहा, “हम नहीं चाहते कि किसी और के साथ वैसा हो, जैसा हमारे साथ हुआ। हम सिर्फ शांति चाहते हैं। उन आतंकियों को सजा मिलनी चाहिए, जिन्होंने मासूमों को मारा।” उन्होंने मुस्लिम और कश्मीरियों के खिलाफ नफरत भरे बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सही नहीं है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भी अपने पति की तरह देश सेवा का रास्ता चुनेंगी, तो उन्होंने हामी भरी।
2. विनय के विचारों को लोगों का साथ मिलेगा
विनय की बहन सृष्टि नरवाल ने कहा, “यह रक्तदान शिविर विनय के जन्मदिन पर आयोजित किया गया है। करनाल और आसपास के लोगों ने बड़ी संख्या में इसमें हिस्सा लिया। लोगों की सहभागिता से विनय के विचार आगे बढ़ेंगे।”
हमले की दर्दनाक यादें: “मैं चिल्लाई, लेकिन कोई नहीं आया”
हिमांशी ने 22 अप्रैल के हमले की भयावह घटना को याद करते हुए बताया, “हम पहलगाम से बाइसरन जा रहे थे। अचानक फायरिंग शुरू हो गई। एक आतंकी ने विनय को देखकर कहा, ‘यह भी मुस्लिम नहीं है’, और उन पर गोली चला दी। मैं चिल्लाई, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। पुलिस को पहुंचने में एक घंटा लगा।”
उन्होंने कहा कि विनय को तुरंत चिकित्सा सहायता नहीं मिली और उन्हें श्रीनगर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। हिमांशी ने मांग की कि विनय को देश का सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।
हमले में 26 लोगों की मौत
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल थे। विनय को उनकी पत्नी हिमांशी के सामने ही गोली मारी गई थी।








