महिला आरक्षण पर अमल में जनगणना और परिसीमन की क्या भूमिका है?

  • 2026 से जनगणना के साथ जातीय गणना की भी शुरुआत
  • महिला आरक्षण की राह में जनगणना और परिसीमन अहम कड़ी
  • परिसीमन से बदलेगा राजनीतिक प्रतिनिधित्व का गणित

नई दिल्ली: देश में जनगणना, जातीय गणना, परिसीमन और संसद तथा विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया एक साथ शुरू होगी, क्योंकि इन सभी की समयसीमा 2026 में एक साथ आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, जनगणना और जातीय गणना 2026 से शुरू होगी, क्योंकि 2001 में लोकसभा सीटों की संख्या 2026 तक के लिए फ्रीज की गई थी।

परिसीमन भी 2026 से, महिला आरक्षण पर भी असर

परिसीमन की प्रक्रिया भी 2026 से शुरू होगी। अगर 2021 में जनगणना समय पर हो जाती, तो परिसीमन 2031 की जनगणना के आधार पर होता। इस बीच, प्रशासनिक सीमाएं बदलने की अंतिम तिथि 1 जून 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दी गई है।

जनगणना और परिसीमन में कितना समय लगेगा?

  • जनगणना: प्रश्नावली, सॉफ्टवेयर और तकनीकी उपकरण तैयार करने में 1-2 साल लगेंगे। फील्डवर्क 2-3 महीने चलेगा, जबकि डेटा सत्यापन और प्रकाशन में 1-2 साल और लग सकते हैं। कुल मिलाकर पूरी प्रक्रिया में 3-4 साल लग सकते हैं।

  • परिसीमन: आयोग गठन में 1-2 महीने, डेटा संग्रह में 6-12 महीने, सार्वजनिक परामर्श में 6-12 महीने और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में 3-6 महीने लगेंगे। कुल मिलाकर इसमें 2-3 साल का समय लग सकता है।

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