कैसे महाकाल मंदिर के कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया-और क्या नुकसान हुए

  • महाकाल मंदिर परिसर में लगी आग, कारण और प्रभाव
  • आग लगने के बाद भक्तों की सुरक्षा पर सवाल
  • महाकाल मंदिर में आग, एक कर्मचारी की झुलसी हाथों की कहानी

उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के कंट्रोल रूम की छत पर सोमवार दोपहर आग लग गई, जिससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (एयर क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम) की बैटरियां जलकर नष्ट हो गईं। आग की लपटें दूर से ही दिखाई दीं, जिसके बाद मंदिर प्रशासन ने भक्तों का प्रवेश रोक दिया। आग बुझाने के दौरान एक मंदिर कर्मचारी के दोनों हाथ झुलस गए।

शॉर्ट सर्किट से लगी आग

घटना मंदिर के गेट नंबर-1 के पास स्थित अवंतिका गेट के कंट्रोल रूम की छत पर हुई। सूचना मिलते ही अग्निशमन दल मौके पर पहुंचा और कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया गया। प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग नियंत्रित होने के बाद मंदिर के गेट को फिर से खोल दिया गया।

प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे

घटना की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक और नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि आग में केवल बैटरियों को नुकसान पहुंचा है और कोई जनहानि नहीं हुई।

कर्मचारी के हाथ झुलसे

आग बुझाने के दौरान मंदिर समिति के कर्मचारी संतोष पाठक के दोनों हाथ झुलस गए। वह आग पर काबू पाने के लिए जलते हुए पाइप हटा रहे थे, जिस दौरान उन्हें चोट आई। उन्हें मंदिर परिसर के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। हालांकि, उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

नेताओं ने जताई चिंता

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा, “महाकाल मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां सुरक्षा के मद्देनजर बेहतर इंतजाम किए जाने चाहिए। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करके भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना चाहिए।”

वहीं, मध्य प्रदेश पीसीसी प्रमुख जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मोहन सरकार मंदिर की सुरक्षा को लेकर लापरवाह है। महाकाल मंदिर में भ्रष्टाचार मुक्त और कमीशन रहित व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।”

अन्य कोई नुकसान नहीं

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस घटना से मंदिर के मुख्य परिसर या किसी धार्मिक संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, इसके बाद मंदिर परिसर में विद्युत और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग उठने लगी है।

प्रशासन ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने का आश्वासन दिया है।

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