क्या सरकारी दफ्तरों को दी जाने वाली छूट आम जनता के लिए नुकसानदेह है?

  • सरकारी विभागों से वसूली में ढील- आम उपभोक्ताओं पर सख्ती का विरोध
  • 30 करोड़ रुपये का बकाया- सरकारी दफ्तरों की खामोशी पर सवाल
  • विद्युत विभाग का दोहरा रवैया- आम जनता और सरकारी दफ्तरों में अंतर

अम्बेडकरनगर। जिले के विद्युत विभाग की एक ही नीति दो पैमाने वाली नजर आ रही है। आम उपभोक्ताओं के थोड़े से बकाये पर भी कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाती है, जबकि सरकारी विभागों के 30 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि को लेकर विभाग नरम रुख अपनाए हुए है।

किस विभाग पर कितना बकाया?

विद्युत विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले के 42 उपकेन्द्रों के तहत पंजीकृत 4 लाख 27 हजार उपभोक्ताओं में से आम लोगों पर छोटी-सी देरी भी नहीं बर्दाश्त की जाती। वहीं, सरकारी विभागों की करोड़ों की बकाया राशि पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

  • पंचायती राज विभाग: 15 करोड़ रुपये बकाया

  • मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय: 5 करोड़ 43 लाख रुपये से अधिक

  • अन्य शासकीय कार्यालय: लाखों रुपये लंबित

आम उपभोक्ता vs सरकारी विभाग

विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि आम उपभोक्ताओं के 10-15 हजार रुपये बकाया होने पर उनका कनेक्शन काट दिया जाता है, लेकिन सरकारी दफ्तरों से वसूली के लिए सिर्फ नोटिस भेजकर काम चलाया जा रहा है। पिछले महीने आम उपभोक्ताओं से बकाया वसूलने के लिए शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक विशेष शिविर लगाए गए, लेकिन सरकारी विभागों के मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

विभाग का बयान

इस मामले में अधीक्षण अभियंता राज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सरकारी विभागों को बकाया बिल की सूची भेजी गई है और समय पर भुगतान के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी विभाग ने भुगतान की कोई ठोस पहल नहीं की है।

आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा बोझ?

विद्युत विभाग के सूत्रों का मानना है कि अगर सरकारी विभागों से समय पर बकाया वसूला नहीं गया, तो इसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। विभाग की यह निष्क्रियता वित्तीय प्रबंधन और संचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

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