पराली जलाने पर कार्रवाई: दो किसानों पर 10 हजार रुपये जुर्माना

  • पिछले वर्ष 128 घटनाएं दर्ज, 4 लाख रुपये का अर्थदंड, 2.5 लाख रुपये की वसूली
  • तहसील और ब्लॉक स्तर पर टीमों द्वारा किसानों को जागरूक किया जा रहा है
  • पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए कड़े निर्देश

अंबेडकरनगर। धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए जनपद प्रशासन सक्रिय है। पर्यावरण प्रदूषण रोकने और भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के उद्देश्य से विभिन्न तहसील और ब्लॉक स्तर पर टीमों का गठन किया गया है। इस क्रम में बीते सप्ताह अकबरपुर क्षेत्र के दो किसानों पर कुल 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा, जनपद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया

उपकृषि निदेशक डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि दो एकड़ तक के खेतों में पांच हजार रुपये, दो से पांच एकड़ में 10 हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 30 हजार रुपये तक पर्यावरण कम्पंसेशन वसूला जाएगा।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने की बजाय इसे गोशालाओं या जैविक खाद निर्माण के लिए दें।

बीते वर्ष की घटनाओं का आंकलन

पिछले वर्ष जनपद में कुल 128 घटनाएँ दर्ज की गई थीं, जिनमें से 89 पराली जलाने और 39 कूड़ा-करकट जलाने के मामले शामिल थे। कुल चार लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया, जिसमें से केवल 2.5 लाख रुपये की वसूली हो सकी। उपचुनाव के दौरान वसूली की प्रक्रिया थोड़ी धीमी पड़ गई थी, जिससे कुछ मामलों में कार्रवाई ठंडी बस्ते में डाल दी गई।

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