
- परिवार ने दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया
- जबलपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर सुनवाई
- अभिनेत्री का अंतिम संस्कार 24 मई को किया गया
नई दिल्ली। टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका पर आरोपियों को बचाने का नैरेटिव चलाना बेहद दुखद है और इससे न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार या दूसरे पक्ष के बयानों के पीछे भागने के बजाय मामले को कानून के अनुसार आगे बढ़ने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए खुद इस मामले की निगरानी कर रही है।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं। वहीं, इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर सुनवाई भी होनी है।
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। अभिनेत्री के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा ड्रग एडिक्शन की समस्या से जूझ रही थीं।
घटना के 13 दिन बाद 24 मई को उनका अंतिम संस्कार किया गया। मामले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर न्यायपालिका तक बहस तेज हो गई है और अब सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद यह केस राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।









