प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी आस्था चुनने और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने वाली दो बालिग बहनों को उनके पिता ने उनकी इच्छा के खिलाफ घर में रखा। कानूनी अधिकार के बिना किसी बालिग की स्वतंत्रता पर रोक लगाना गैरकानूनी हिरासत है और यह संविधान से मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
कोर्ट ने दोनों बहनों को उनकी इच्छा के विरुद्ध घर में रखने के मामले में पिता और उत्तर प्रदेश सरकार को कुल 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
बालिग को अपनी आस्था चुनने का अधिकार
जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने आगरा की दीया भाटिया उर्फ जोया दीया भाटिया (20) और अंशु भाटिया उर्फ अमीना अंशु भाटिया (35) की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह आदेश दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार धर्म और आस्था चुनने का अधिकार है। साथ ही वह अपने जीवन से जुड़े फैसले भी ले सकता है, बशर्ते उसके फैसले कानून के दायरे में हों।
41 दिन बाद दर्ज हुआ अपहरण का केस
मामले के मुताबिक, दोनों बहनें 24 मार्च 2025 को अपने घर से चली गई थीं। इसके करीब 41 दिन बाद पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। मामले में साइमा उर्फ खुशबू को नामजद किया गया था।
करीब चार महीने बाद दोनों बहनें अपने घर से लगभग 1,300 किलोमीटर दूर कोलकाता में मिलीं। पुलिस ने उन्हें बरामद करने के बाद उनके पिता को सौंप दिया था।
पिता पर लगाया जबरन रोकने का आरोप
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में दोनों बहनों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ घर में रखा गया। उन्होंने अपनी स्वतंत्रता और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिकार का हवाला देते हुए अदालत से राहत की मांग की।









