
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव: चीन, जापान और दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के इस कदम का विरोध किया।
इजराइल की पहल: अमेरिकी उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटाई।
भारत की प्रतिक्रिया: सरकार ने अमेरिकी दावों को किया खारिज, व्यापार वार्ता जारी।
अमेरिकी उद्योगों को लाभ: टैरिफ नीति से घरेलू व्यवसायों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद।
वॉशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अप्रैल से ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लागू करने का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार को मजबूत करना और उन देशों को जवाब देना है, जो अमेरिकी उत्पादों पर अधिक कर लगाते हैं।
ट्रम्प ने कहा कि भारत समेत कई देश अमेरिका के उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाते हैं, जिससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान होता है। इस नीति के तहत अब अमेरिका भी इन देशों पर समान शुल्क लगाएगा। उन्होंने विशेष रूप से भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय बाजार में अमेरिकी उत्पादों को महंगे टैरिफ का सामना करना पड़ता है, जिसे अब बराबरी से जवाब दिया जाएगा।
इसी बीच, इजराइल ने अमेरिकी उत्पादों पर सभी प्रकार की कस्टम ड्यूटी समाप्त कर दी है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। दूसरी ओर, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया ने इस फैसले के विरोध में आपसी व्यापार सहयोग को बढ़ाने और एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर चर्चा करने की योजना बनाई है।
भारत सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ टैरिफ में किसी भी प्रकार की कटौती को लेकर अभी तक कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है। भारतीय वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने बताया कि अमेरिका के साथ व्यापारिक वार्ता अभी जारी है और भारत अपने हितों को प्राथमिकता देगा।
ट्रम्प की इस घोषणा से वैश्विक व्यापारिक माहौल में तनाव बढ़ सकता है और विभिन्न देशों की आर्थिक रणनीतियों पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।








