
- घूसखोरी पर सख्त कार्रवाई: एंटी करप्शन टीम ने कानपुर में सरकारी अफसर को पकड़ा
- एफसीआई ठेकेदार से रिश्वत मांगने का आरोप, जांच के बाद की गई गिरफ्तारी
- घूसखोरी के खिलाफ शिकंजा: अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज, लखनऊ ले जाया जाएगाकानपुर। कानपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन टीम ने जिलापूर्ति कार्यालय के वाणिज्य सहायक निरीक्षक (सीएआई) हिमांशु गुप्ता को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अधिकारी ने एफसीआई से कोटेदार की दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने वाले ठेकेदार से किलोमीटर फीडिंग के नाम पर रिश्वत मांगी थी। एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर ने कोतवाली थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है और उसे लखनऊ ले जाने की तैयारी की जा रही है।
ऐसे हुआ खुलासा
ठेकेदार अभिषेक श्रीवास्तव को एफसीआई से कोटेदार की दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने का ठेका मिला था। वह महीने में दो बार खाद्यान्न पहुंचाते हैं, और दूरी के आधार पर उनका भुगतान होता है। जब उन्होंने भुगतान के लिए जिलापूर्ति कार्यालय में किलोमीटर फीडिंग की सूची जमा कराई, तो अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने इस काम के बदले रिश्वत की मांग की। शुरुआत में उसने पूरे स्टाफ के लिए एक लाख रुपये मांगे, लेकिन ठेकेदार के मना करने पर 10 हजार रुपये की मांग पर सहमति जताई।
ऐसे हुआ ट्रैप
ठेकेदार ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत एंटी करप्शन टीम से की। योजना के तहत जिलाधिकारी से गवाह के रूप में दो कर्मचारियों को नियुक्त कराया गया। ठेकेदार को दिए गए 10 हजार रुपये पर केमिकल पाउडर लगाया गया, ताकि रिश्वत लेते ही पकड़ा जा सके। जैसे ही अधिकारी ने रुपये लिए, टीम ने उसे रंगेहाथ दबोच लिया। कोतवाली थाने में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और गुरुवार को आरोपी को लखनऊ कोर्ट में पेश किया जाएगा।
आरोपी की पृष्ठभूमि
पकड़ा गया वाणिज्य सहायक निरीक्षक हिमांशु गुप्ता दो महीने पहले ही उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से जिलापूर्ति कार्यालय में संबद्ध किया गया था। उसे राशन ले जाने वाले वाहनों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उसने ठेकेदारों से अवैध वसूली शुरू कर दी। भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।








