मुंबई। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी चर्चित फिल्म बनाने वाले निर्देशक अनुराग कश्यप के करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक किस्सा फिल्मी दुनिया में चर्चा का विषय रहा है। संघर्ष के दिनों में अनुराग को एक फिल्म निर्देशित करने का मौका मिला। वह इसकी कहानी लेकर हिंदी सिनेमा के एक दिग्गज अभिनेता के पास पहुंचे। कहानी सुनकर अभिनेता इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने लंबे समय बाद कैमरे के सामने लौटने की इच्छा जाहिर की। लेकिन फिल्म के क्लाइमैक्स ने पूरी कहानी बदल दी।
कहानी सुनकर अभिनेता ने जताई काम करने की इच्छा
किस्से के मुताबिक, अनुराग कश्यप ने जब दिग्गज अभिनेता को फिल्म की कहानी सुनाई, तो वह काफी उत्साहित हो गए। उन्होंने अनुराग से कहा, “बेटा, बहुत समय हो गया है मेरे मुंह पर मेकअप नहीं लगा। बहुत अच्छी कहानी है तुम्हारी, करते हैं।”
अनुराग के लिए उस अभिनेता के साथ काम करना किसी सपने के सच होने जैसा था। उन्हें उम्मीद थी कि इस फिल्म से उनके करियर को नई दिशा मिल सकती है।
क्लाइमैक्स ने बिगाड़ दिया पूरा खेल
कहानी में मोड़ तब आया, जब अभिनेता के बेटे को पता चला कि फिल्म के अंत में उनके पिता के किरदार की मौत हो जाती है। बताया जाता है कि बेटे ने इस वजह से अपने पिता को फिल्म में काम करने से मना कर दिया।
जब अनुराग ने इसकी वजह पूछी, तो बेटे ने स्पष्ट जवाब दिया— “Deols don’t die”, यानी देओल्स नहीं मरते।
फिल्मी दुनिया में चर्चा में रहा किस्सा
इस एक टिप्पणी ने अनुराग कश्यप की फिल्म को लेकर बन रही योजना पर सवाल खड़े कर दिए। यह किस्सा फिल्म की कहानी और कलाकारों के चयन के बीच आने वाले अप्रत्याशित मोड़ को दिखाता है। हालांकि, दिए गए विवरण में फिल्म और संबंधित अभिनेता के नाम का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।









