मध्यस्थता कानून न्याय के कल्चर से भागीदारी के कल्चर की ओर बड़ा बदलाव

पणजी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शुक्रवार को पणजी में कहा कि मध्यस्थता कानून की मजबूती का संकेत है, न कि कमजोरी। उन्होंने इसे न्याय के कल्चर से भागीदारी के कल्चर की ओर सच्चा बदलाव बताया, जहां सद्भावना और सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

CJI सूर्यकांत ने यह बात इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च के कार्यक्रम मिडिएशन अवेयरनेस वॉकथॉन में कही। उन्होंने ‘मध्यस्थता: आज के संदर्भ में कितना महत्वपूर्ण’ विषय पर अपने विचार साझा किए।

मल्टी-डोर कोर्टहाउस की कल्पना

CJI सूर्यकांत ने कहा कि वे मल्टी-डोर कोर्टहाउस की ओर बदलाव की कल्पना करते हैं, जहां कोर्ट केवल ट्रायल का स्थान न होकर विवाद समाधान का व्यापक केंद्र बने।

कार्यक्रम में 2 लाख मिडिएटर्स ने वॉकथॉन में भाग लिया और साथ ही पौधारोपण भी किया गया।

‘मीडिएशन फॉर नेशन’ पहल

  • सुप्रीम कोर्ट ने ‘मीडिएशन फॉर नेशन’ पहल शुरू की है।
  • इसका संदेश न्याय के उपभोक्ताओं और स्टेकहोल्डर्स (बार और बेंच) दोनों के लिए है।
  • मीडिएशन प्री-लिटिगेशन स्टेज और पुराने व नए मामलों दोनों के लिए कारगर है।

देश को 2.5 लाख से अधिक मध्यस्थों की जरूरत

  • CJI सूर्यकांत ने कहा कि मीडिएशन को ट्रायल का विकल्प बनाने के लिए जागरूकता जरूरी है।
  • हाल के वर्षों में मीडिएशन की सफलता दर में 30% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
  • देश में 2.5 लाख से ज्यादा प्रशिक्षित मध्यस्थों की आवश्यकता है।

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