देशद्रोह के मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर माद्री काकोटी को हाईकोर्ट से राहत

  • 28 अप्रैल को हसनगंज थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर
  • हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर दी अंतरिम राहत
  • अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी

लखनऊ। सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर देशद्रोह समेत कई धाराओं में दर्ज एफआईआर के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर माद्री काकोटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

28 अप्रैल को दर्ज हुई थी FIR
हसनगंज थाने में माद्री काकोटी के खिलाफ देशद्रोह, BNS की धारा 152 और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसे शब्द लिखे जो देश की सुरक्षा और साम्प्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ के तहत मिली अंतरिम राहत
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एसएम हैदर रिजवी और एसएम जैदी ने दलील दी कि यह पोस्ट आतंकवाद के समर्थन में नहीं थी, बल्कि एक वैचारिक टिप्पणी थी जिसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने इस आधार पर गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अभियोजन पक्ष को काउंटर दाखिल करने का आदेश दिया है।

ABVP का विरोध, गैर-जिम्मेदाराना बताया बयान
ABVP के लखनऊ महानगर सहमंत्री जतिन शुक्ला ने प्रोफेसर के पोस्ट को गैर-जिम्मेदाराना और देश को कमजोर करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि जब देश आतंकवादी हमले का सामना कर रहा हो, उस समय इस तरह की पोस्ट पीड़ितों के लिए पीड़ादायक होती है।

कोर्ट ने माना— पोस्ट से देश की संरचना नहीं डगमगाई
वकील रिजवी ने बताया कि कोर्ट ने माना है कि माद्री काकोटी की पोस्ट से देश की संवैधानिक संरचना पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ा।

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