
- फोन पर तीन तलाक देने के बाद घर से निकाला गया
- शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की
- कानून के बावजूद एफआईआर और गिरफ्तारी नहीं हुई
अंबेडकरनगर। जनपद के बबनपुर, सिझौली गांव से सामने आए एक मामले ने तीन तलाक कानून की जमीन पर हकीकत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फातिमा नाम की महिला ने अपने पति पर फोन पर तीन तलाक देने और ससुराल पक्ष पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि उसने स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
फोन पर तलाक, फिर घर से निकाला गया
फातिमा के मुताबिक, उनके पति मोहम्मद फिरोज मुंबई में रहते हैं। उन्होंने फोन पर तीन बार तलाक कहकर रिश्ता तोड़ दिया। इसके बाद सास खैरुन निशा, ननद सबनम और खुशबू ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। पीड़िता का आरोप है कि तलाक के बाद भी उसे लगातार प्रताड़ना का शिकार बनाया गया।
कानून है, पर कार्रवाई नहीं?
तीन तलाक को अपराध घोषित किया जा चुका है। केंद्र सरकार द्वारा पारित कानून के तहत यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद, फातिमा के मामले में अब तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही कोई गिरफ्तारी की गई है।
इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब स्पष्ट कानून मौजूद है, तो फिर इस मामले में कार्रवाई में देरी क्यों? क्या संबंधित विभागों की लापरवाही के चलते आरोपी खुले घूम रहे हैं?








