ब्रासीलिया। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में झटका लगा है। 4 अक्टूबर को हुए मतदान में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो सबसे ज्यादा वोट हासिल कर पहले स्थान पर रहे। लूला दूसरे स्थान पर रहे। किसी भी उम्मीदवार को 50% से अधिक वोट नहीं मिले, इसलिए अब दोनों के बीच 25 अक्टूबर को दूसरे दौर का मुकाबला होगा।
फ्लावियो और लूला के बीच करीब 2% का अंतर
ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, 99.99% वोटों की गिनती के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03% यानी करीब 5.61 करोड़ वोट मिले। वहीं लूला को 45.16% यानी करीब 5.39 करोड़ वोट हासिल हुए। दोनों के बीच करीब 1.87 प्रतिशत अंक का अंतर रहा।
राष्ट्रपति बनने के लिए किसी उम्मीदवार को पहले दौर में 50% से ज्यादा वैध वोट हासिल करना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का चुनाव होता है।
सर्वे में लूला को बढ़त, नतीजों में फ्लावियो आगे
चुनाव से पहले जारी कई सर्वेक्षणों में लूला को फ्लावियो से आगे बताया गया था। हालांकि, मतदान के बाद सामने आए नतीजों में फ्लावियो बोल्सोनारो ने लूला को पीछे छोड़ दिया। अब दोनों नेता 25 अक्टूबर के दूसरे दौर में आमने-सामने होंगे।
जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं फ्लावियो
फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और ब्राजील की राजनीति में दक्षिणपंथी खेमे के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। जायर बोल्सोनारो को 2022 का चुनाव हारने के बाद सत्ता पलटने की साजिश के मामले में 27 साल की सजा सुनाई गई है। फ्लावियो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सहयोगी माना जाता है।
दूसरे उम्मीदवारों के वोट होंगे अहम
पहले दौर में लूला और फ्लावियो के अलावा कई अन्य उम्मीदवार भी मैदान में थे। इनमें ऑगस्टो क्यूरी को 2.89%, रेनान सैंटोस को 2.24% और रोनाल्डो काइआडो को 2.18% वैध वोट मिले। अब इन उम्मीदवारों को मिले वोट दूसरे दौर में दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बाहर हुए प्रमुख उम्मीदवारों में से कौन लूला या फ्लावियो का समर्थन करेगा। दूसरे दौर के प्रचार में इन दलों और नेताओं का रुख अहम रहेगा।
21% से ज्यादा मतदाताओं ने नहीं डाला वोट
पहले दौर में 21.08% मतदाताओं ने मतदान नहीं किया। ऐसे में दूसरे दौर में मतदान प्रतिशत भी चुनाव का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा। इसके अलावा पहले दौर में पड़े वोटों का स्थानांतरण और दोनों उम्मीदवारों की ओर से नए मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर भी नजर रहेगी।









