शहजादपुर में उपभोक्ता ने लगाए गंभीर आरोप

  • कर्मचारी विनीत पाल पर ₹10,000 की रिश्वत मांगने का आरोप
  • पुराने बिजली पोल होने के बावजूद लाइन नहीं डाली गई, उपभोक्ता निजी केबल पर निर्भर
  • शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं, पारदर्शिता पर सवाल

अंबेडकरनगर। बिजली विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कस्बा शहजादपुर में एक उपभोक्ता ने विभाग पर रिश्वतखोरी, मनमानी और शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। महज 37 मीटर की दूरी पर बिजली कनेक्शन के लिए ₹41,274 का एस्टीमेट थमाया गया, जबकि शुरुआत में यही राशि ₹35,702 थी। उपभोक्ता का दावा है कि विभागीय कर्मचारी ने ₹10,000 की रिश्वत मांगी और इनकार करने पर आवेदन को बार-बार टाल दिया गया।

तीन बार ऑनलाइन आवेदन के बाद मिला एस्टीमेट

शहजादपुर स्थित रामसमुझ सूरसती महाविद्यालय के पीछे रहने वाले उपभोक्ता का कहना है कि उन्होंने बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। दो बार बिना किसी स्पष्ट कारण के आवेदन निरस्त कर दिए गए। तीसरे प्रयास में विभाग ने ₹41,274 का एस्टीमेट जारी किया, जो 37 मीटर की दूरी के हिसाब से अत्यधिक बताया जा रहा है।

कर्मचारी पर ₹10 हजार की मांग का आरोप

उपभोक्ता ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग में तैनात विनीत पाल नामक कर्मचारी ने खुले तौर पर ₹10,000 की रिश्वत मांगी। पैसा न देने पर लंबे समय तक फाइल को लटकाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, विभागीय कर्मचारियों की इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।

पहले से गड़े पोल, फिर भी नहीं पहुंची बिजली

इलाके में वर्षों पहले बिजली के पोल तो गाड़ दिए गए थे, लेकिन आज तक उन पर लाइन नहीं डाली गई। कई उपभोक्ता निजी केबल के सहारे किसी तरह बिजली चला रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग की यह कार्यप्रणाली अब “सेवा” नहीं, “कमाई स्कीम” बन चुकी है।

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