
- 15वें वित्त आयोग की धनराशि से स्वच्छता, जल संरक्षण, वायु गुणवत्ता सुधार जैसे काम हुए
- लखनऊ को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रथम स्थान और गार्बेज फ्री सिटी में 3 स्टार रेटिंग मिली
- 16वें वित्त आयोग से राशि की वृद्धि और समयबद्ध वितरण पर जोर
लखनऊ। सोमवार को हुई बैठक में लखनऊ नगर निगम ने 16वें वित्त आयोग से शहर के विकास के लिए लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की मांग की है। नगर निगम के प्रतिनिधि और पार्षद अरुण तिवारी ने शहर के विस्तार, बढ़ती आबादी और तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस राशि की जरूरत को रेखांकित किया।
पार्षद अरुण तिवारी ने बताया कि पिछले दस वर्षों में लखनऊ का भौगोलिक विस्तार हुआ है और कई ग्रामीण इलाके नगर निगम में शामिल किए गए हैं। इससे शहर की आबादी भी बढ़कर लगभग 48.60 लाख तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि सोलर पैनल लगाने, ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर और पब्लिक ई-चार्जिंग स्टेशन जैसी तकनीकी परियोजनाओं के साथ-साथ जल आपूर्ति, सड़क, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पार्क, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक प्रबंधन आदि के खर्चों के लिए भी विशेष धनराशि आवश्यक है।
बैठक में नगर निगम ने विस्तारित क्षेत्रों के प्रभावी विकास के लिए डीपीआर के अनुसार करीब 7207 करोड़ रुपए की मांग की, जबकि मूलभूत आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त 3500 करोड़ की आवश्यकता जताई गई।
आबादी और विस्तार ने बढ़ाई चुनौती
अरुण तिवारी ने बताया कि नए जोड़े गए क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर है। 83 प्रतिशत नए इलाकों में नाले, सीवर लाइनें और पेयजल जैसी जरूरी सेवाएं अभी भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे लाखों निवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।








