क्या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आत्महत्या की पुष्टि करती है या कुछ और छिपा है?

  • क्या पुलिस ने जांच में लापरवाही बरती?
  • क्या शुरुआती जांच में साक्ष्य नजरअंदाज किए गए?
  •  कैसे- आरोपी की गिरफ्तारी और न्याय की प्रक्रिया

लखनऊ।  लखनऊ के हजरतगंज थाना क्षेत्र में 24 वर्षीय दलित छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु का मामला सामने आया है। छात्रा का शव उसके कथित मित्र पवन बरनवाल के घर में मिला, जिससे परिवार और समाज में आक्रोश व्याप्त है।

घटना का विवरण

बुधवार सुबह छात्रा कोचिंग के लिए घर से निकली थी। शाम करीब 4:30 बजे उसकी चचेरी बहन को पवन बरनवाल ने सूचित किया कि छात्रा उसके घर में बेहोश पड़ी है। जब परिजन वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि छात्रा पंखे से लटकी हुई थी, लेकिन उसके शरीर पर कोई स्पष्ट चोट के निशान नहीं थे। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिवार का आरोप

मृतका के पिता का कहना है कि उनकी बेटी पढ़ाई में होनहार थी और पुलिस अफसर बनना चाहती थी। उन्होंने आत्महत्या की संभावना को खारिज करते हुए पवन बरनवाल पर हत्या का आरोप लगाया है। परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उसके घर पर बुलडोजर चलाने की मांग की है।

पुलिस की प्रतिक्रिया

पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया है। एडीसीपी सेंट्रल मनीषा सिंह के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगाना पाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित की हैं।

समाज में आक्रोश

घटना के बाद समाजसेवी और स्थानीय निवासी पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और टालमटोल करती रही।

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