
आगरा। राजस्थान के भरतपुर जिले में मिट्टी धंसने से एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि परिवार के एक सदस्य दिनेश कुमार की आंखों के सामने उनकी दो भाभियां, भतीजा और भतीजी तड़पते रहे, लेकिन वह कुछ नहीं कर सके। खुद दिनेश और उनकी भाभी गर्दन तक मिट्टी में दबे रहे और ग्रामीणों ने उन्हें करीब एक घंटे बाद बाहर निकाला।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
यह दर्दनाक हादसा 29 जून की सुबह करीब 8:30 बजे हुआ। चंबल प्रोजेक्ट के तहत पाइप लाइन डालने के लिए गांव में बड़ा गड्ढा खोदा गया था। उसी गड्ढे से मिट्टी निकालते समय यह हादसा हो गया। अचानक मिट्टी धंस गई और परिवार के 10 लोग दब गए।
मृतकों में ये शामिल
अनुकूल (22) पुत्र विजेंद्र सिंह
योगेश देवी (25) पत्नी अमित
विनोद देवी (55) पत्नी मुंशीलाल
विमला देवी (45) पत्नी श्रीपद
घायलों में शामिल हैं:
दिनेश कुमार (38) पुत्र नाहर सिंह
जयश्री (50) वर्ष पत्नी विजेंद्र सिंह
चश्मदीद ने बताया – “मैंने मौत को सामने से देखा”
गंभीर रूप से घायल दिनेश कुमार ने बताया –
“मेरे सामने पूरा परिवार मिट्टी में दब गया। मैं खुद भी गर्दन तक दबा था। लोग पहुंचे तो मुझे निकाला, लेकिन मेरी आंखों के सामने मेरी भाभियां और भतीजे-भतीजी दम तोड़ते रहे। अब तो ऐसा लगता है जैसे मैं जीते जी मर गया हूं।”
मातम में डूबा गांव
यह हादसा उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी के उत्तू गांव का है, जो आगरा से 48 किलोमीटर दूर है। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। घर-घर मातम है। लोग सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। महिलाएं रो-रोकर बेहाल हैं।
अनुकूल की मां जयश्री अपने बेटे को याद करते हुए बार-बार यही कह रही थीं —
“मेरो बेटा गयो…मेरे बेटा कूं ले आओ…मैं लुट गई…”
कोई भी उन्हें चुप नहीं करा पा रहा था।
प्रशासन की लापरवाही या हादसा?
गांव के लोगों ने सवाल उठाया कि अगर गड्ढे को उचित तरीके से बंद किया गया होता या सुरक्षा के उपाय किए गए होते, तो यह हादसा रोका जा सकता था। प्रशासन इस ओर पहले ध्यान नहीं दे सका।








