
- मक्खापुर अहलादे व भीतरीडीह में जल जीवन मिशन ढांचा बना, पानी नहीं
- टंकी, सोलर पैनल तैयार, लेकिन नल सूखे
- ग्रामीण पुराने कुएँ और हैंडपंप पर निर्भर
अम्बेडकरनगर। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण भारत के हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। लेकिन अम्बेडकरनगर जिले के मक्खापुर अहलादे और भीतरीडीह गांवों की स्थिति इस उद्देश्य से बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। यहां योजना का ढांचा तो खड़ा कर दिया गया है — बड़ी पानी की टंकी, सोलर पैनल, रंगी-पुती दीवारें — लेकिन दो वर्ष बीतने के बावजूद एक बूंद पानी भी नलों से नहीं टपका है।
टंकी बनी, सोलर सिस्टम भी लगा… फिर भी सूखा नल
गांव के बीचों-बीच बनी विशाल जल टंकी और उस पर स्थापित सोलर पैनल दूर से देखने में किसी आदर्श योजना का प्रतीक लगते हैं। पर हकीकत यह है कि ये संरचनाएं केवल “दिखावे” तक ही सीमित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य के समय कुछ गतिविधियाँ जरूर हुईं, लेकिन उसके बाद संचालन की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।
हर घर नल का सपना अधूरा
जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर तक नल से पानी पहुँचाने का वादा किया गया था। लेकिन दोनों गांवों में आज भी लोग पुराने संसाधनों, कुएँ, हैंडपंप या दूरदराज के चापाकलों पर निर्भर हैं। गर्मी के मौसम में यह संकट और भी गहरा जाता है, जब जलस्तर गिर जाता है और पीने योग्य पानी की उपलब्धता सीमित हो जाती है।








