गंगा का जल एक बार फिर जांच में फेल- तीनों स्थानों पर बढ़ा प्रदूषण

कानपुर। बिठूर से लेकर शेखपुर गांव तक गंगा का पानी एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में है। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की ताज़ा जांच रिपोर्ट में गंगा जल तीनों स्थानों—बिठूर, गंगा बैराज और शेखपुर—पर गुणवत्ता की कसौटी पर फेल हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक गंगा में बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और फीकल कोलीफॉर्म (मानव व पशु अपशिष्ट) की मात्रा मानक से कहीं अधिक पाई गई है।

न पीने लायक, सिर्फ स्नान योग्य पानी

UPPCB के अधिकारियों के अनुसार इस जल को पीने योग्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह सिर्फ स्नान आदि कार्यों में ही उपयोग किया जा सकता है। जल में घुली विषैली गंदगी ने गंगा को आचमन लायक भी नहीं छोड़ा है।

शहर में घुसते ही गंदा हो जाता है गंगा का पानी

गंगा नदी हरिद्वार और नरौरा से होते हुए शिवराजपुर और बिठूर के रास्ते कानपुर में प्रवेश करती है। लेकिन शहर में घुसते ही गंगा जल में गिरते सीवर, नाले और अपशिष्टों के कारण पानी की गुणवत्ता बुरी तरह बिगड़ जाती है।

9 जून को लिए गए थे सैंपल, तीनों जगहों पर हाल खराब

प्रदूषण बोर्ड ने 9 जून को बिठूर, गंगा बैराज और शेखपुर गांव से पानी के सैंपल लिए थे। जांच में पीएच वैल्यू, बीओडी, सीओडी और फीकल कोलीफॉर्म सभी मानकों से बाहर निकले।

UPPCB रिपोर्ट के आंकड़े:

स्थान पीएच डीओ बीओडी सीओडी फीकल कोलीफॉर्म (MPN/100ml)
बिठूर 8.46 7.5 3.4 12.4 3100
बैराज 8.43 7.4 3.5 12.8 3300
शेखपुर 8.39 7.1 3.8 13.6 3500
मानक: पीएच – 6.5, डीओ – 5mg/L, बीओडी – 3mg/L, फीकल कोलीफॉर्म – 2500 MPN/100ml

सरकार की कोशिशें नाकाम, NGT ने भी जताई चिंता

गंगा को निर्मल बनाने की तमाम सरकारी योजनाएं फिलहाल फेल होती नजर आ रही हैं। नगर निगम, जल निगम और निजी कंपनियों की लापरवाही के चलते सीवर और अनटैप्ड नालों से गिरता गंदा पानी सीधे गंगा में मिल रहा है। एनजीटी ने भी इस पर गंभीर चिंता जताई है।

क्या होनी चाहिए आदर्श स्थिति?

जानकारों के मुताबिक पीने योग्य पानी में पीएच वैल्यू 6.5 से ऊपर, डीओ 5mg/L, बीओडी 3mg/L और फीकल कोलीफॉर्म 2500 से कम होना चाहिए। लेकिन वर्तमान में ये सभी मानक गंगा जल में उलट नजर आ रहे हैं।

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