
लखनऊ। राजधानी की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल ग्रीन कॉरिडोर की सड़क धंसने के एक महीने बाद भी मरम्मत नहीं की गई है। यह सड़क राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्घाटन के तुरंत बाद ही गंभीर हालात में पहुंच गई थी।
उद्घाटन के सिर्फ दो दिन बाद, बीरबल साहनी मार्ग पर पेयजल लाइन में लीकेज होने के कारण सड़क धंस गई। लीकेज ठीक कर गड्ढा भर दिया गया, लेकिन पूरी तरह से सड़क का निर्माण नहीं किया गया। अब टूटी सड़क पर 5 से 7 मीटर तक बजरी फैली हुई है, जिससे रोजाना वाहन चलाने वालों को दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
हनुमान सेतु से निशातगंज और न्यू हैदराबाद कॉलोनी की तरफ कॉरिडोर पर चढ़ने वाले मार्ग पर बजरी सबसे अधिक फैली हुई है, जिससे लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। यह ग्रीन कॉरिडोर 1220 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इंजीनियर अतुल मिश्रा पर नाराजगी जताते हुए सड़क की मरम्मत के लिए निर्देश दिए थे। इसके साथ ही चार इंजीनियरों की टीम बनाकर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए गए थे। 17 मई को बनाई गई 4 सदस्यीय जांच कमेटी को एक हफ्ते में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था, लेकिन अब एक महीने बाद भी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की टूटी स्थिति और बजरी के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। वहीं, अधिकारियों पर भी परियोजना की जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।









