
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में आरक्षण विवाद पर सुनवाई पूरी
- सरकार ने एकल पीठ के आदेश को दी चुनौती
- चार मेडिकल कॉलेजों में फिर से काउंसलिंग का असर
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अम्बेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है।
राज्य सरकार की दलील
राज्य सरकार ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की थी। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे एन माथुर ने कहा कि यदि एकल पीठ का आदेश लागू होता है तो चारों जिलों में फिर से काउंसलिंग करनी होगी। इससे न केवल इन जिलों में बल्कि अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में भी असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि नई काउंसलिंग से पहले से सीट पाने वाले छात्र बाहर हो जाएंगे, क्योंकि बाकी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ता के वकील मोतीलाल यादव ने तर्क दिया कि चारों कॉलेजों में राज्य कोटे की 85 सीटों में से केवल 7 सीटें ही सामान्य वर्ग के लिए थीं, जबकि 79% से अधिक सीटें आरक्षित वर्ग को दी गई थीं।
पृष्ठभूमि और कानूनी पहलू
एकल पीठ ने 2010 से 2015 के बीच जारी शासनादेशों को रद्द कर दिया था और आरक्षण अधिनियम 2006 का पालन करते हुए नए सिरे से सीटें भरने का आदेश दिया था।
चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक की ओर से इंदिरा साहनी केस का हवाला देते हुए कहा गया कि 50% आरक्षण की सीमा अंतिम नहीं है, लेकिन एकल पीठ ने यह तर्क मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना था कि यह सीमा सिर्फ नियमों के तहत ही बढ़ाई जा सकती है।
अब हाईकोर्ट का फैसला तय करेगा कि इन कॉलेजों में आरक्षण नीति को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।








