
- अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
- नाटो से अमेरिका का ऐतिहासिक किनारा
- कनाडा को 51वां राज्य बनाने की ट्रंप की इच्छा
वॉशिंगटन DC । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन पूरे होने को हैं। इस छोटी सी अवधि में ही उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया। नाटो और डब्लूएचओ से अलग होने से लेकर भारत-चीन जैसे देशों पर टैरिफ बढ़ाने तक, ट्रंप के कदमों ने दुनिया भर में चर्चा बटोरी है। आइए, देखते हैं उनके 10 सबसे चर्चित फैसले:
अवैध प्रवासियों पर सख्त कार्रवाई
ट्रंप सरकार ने अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। सैन्य विमानों से उन्हें उनके मूल देशों में वापस भेजा गया, जिससे कई देशों के साथ अमेरिका के संबंध तनावपूर्ण हो गए।
नाटो से दूरी बनाने का ऐलान
अमेरिका ने नाटो (NATO) से अपने समर्थन को कम करते हुए यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया कि वे रक्षा खर्च में अपना योगदान नहीं दे रहे हैं। ट्रंप ने नाटो छोड़ने तक की धमकी दी, जिससे पश्चिमी गठबंधन में हड़कंप मच गया।
कनाडा को ‘अमेरिका का 51वां राज्य’ कहा
ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का “51वां राज्य” बताकर विवाद खड़ा कर दिया। साथ ही, उन्होंने ग्रीनलैंड, पनामा और गाजा पर अमेरिकी नियंत्रण की इच्छा जताई, जिससे कई देशों में चिंता बढ़ गई।
‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ का बड़ा फैसला
अमेरिका ने उन देशों पर पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगा दिया, जो अमेरिकी सामानों पर शुल्क लगाते थे। इससे भारत, चीन और यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ा, हालांकि बाद में कई देशों ने नई डील के लिए बातचीत शुरू की।
डब्लूएचओ से अमेरिका का बाहर निकलना
कोरोना महामारी के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आलोचना करने वाले ट्रंप ने अमेरिका को इस संगठन से अलग कर लिया। अमेरिका के बिना WHO को चीन के बढ़ते प्रभाव से जूझना पड़ सकता है।
गरीब देशों को यूएसएड में कटौती
अमेरिका ने विकासशील और गरीब देशों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता (USAID) में भारी कटौती की। इससे पानी, दवा और खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाएं प्रभावित हुईं।
यूक्रेन को छोड़कर रूस के करीब जाना
पूर्व राष्ट्रपति बाइडन के विपरीत, ट्रंप ने यूक्रेन के साथ संबंध ठंडे कर दिए और रूस के साथ नजदीकी बढ़ाई। वह व्लादिमीर पुतिन के साथ लगातार संवाद कर रहे हैं, जिससे अमेरिका-रूस व्यापारिक संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी है।
अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ के साथ टकराव
ट्रंप ने कई प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर यहूदी-विरोधी और हमास समर्थन का आरोप लगाया। कुछ छात्रों को वीजा रद्द कर दिया गया और संस्थानों को फंड कटौती का सामना करना पड़ा।
सरकारी नौकरियों में कटौती
अमेरिकी प्रशासन ने सरकारी खर्चे कम करने के लिए हजारों कर्मचारियों की छंटनी की। एलन मस्क की अगुवाई वाली टीम ने कई विभागों को कम कर दिया, जिससे देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए।
ईरान के साथ नए सिरे से डील की कोशिश
पहले कार्यकाल में ईरान परमाणु समझौता (2015) तोड़ने वाले ट्रंप अब एक नई डील की तैयारी में हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह सहयोग नहीं करता है, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा।








