
- समिट में पूर्वोत्तर के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव आए
- पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा व ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा
- दो दिवसीय समिट में B2B और B2G सेशन्स आयोजित किए जा रहे हैं
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भारत मंडपम, नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट’ का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “भारत को दुनिया का सबसे विविधतापूर्ण देश कहा जाता है और हमारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र इसकी सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है।”
इस समिट का उद्देश्य घरेलू और वैश्विक निवेशकों को पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में भागीदार बनाना है। समिट में मंत्री स्तर की बैठकें, B2G और B2B सेशन्स के जरिए पर्यटन, कृषि, हेल्थ, ऊर्जा, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अंबानी ने पूर्वोत्तर के लिए किए 6 वादे, 75,000 करोड़ के निवेश का लक्ष्य
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने अरुणाचल, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों से 6 वादे करते हुए कहा कि,
“रिलायंस पिछले 40 वर्षों में पूर्वोत्तर में 30,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है और अब यह निवेश अगले 5 वर्षों में बढ़ाकर 75,000 करोड़ रुपये किया जाएगा।”
अंबानी ने कहा कि इससे 25 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय सेना की बहादुरी को सलाम किया।
गौतम अडानी की घोषणा – 10 साल में 50,000 करोड़ का निवेश
अडानी ग्रुप के चेयरपर्सन गौतम अडानी ने कहा कि,
“प्रधानमंत्री के ‘एक्ट ईस्ट, एक्ट फास्ट, एक्ट फर्स्ट’ के विजन ने पूर्वोत्तर को नई दिशा दी है। हम अगले 10 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत में 50,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश करेंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि यह निवेश पूर्वोत्तर के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को सशक्त करेगा।
अनिल अग्रवाल: पूर्वोत्तर की ग्रोथ आशा से कहीं अधिक
वेदांता ग्रुप के संस्थापक अनिल अग्रवाल ने कहा कि,
“पूर्वोत्तर की विकास दर हमारी सोच से कहीं अधिक है। इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी और नागरिक उड्डयन मंत्री सिंधिया जी की कड़ी मेहनत है।”
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1 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव
पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने जानकारी दी कि अब तक क्षेत्र में ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 15 अप्रैल को 75 देशों के राजदूतों के साथ विशेष बैठक भी आयोजित की गई थी।








