
नई दिल्ली/अरुणाचल प्रदेश। भारतीय सेना की गजराज कॉर्प्स ने एक इन-हाउस हाई एल्टीट्यूड मोनो रेल सिस्टम विकसित किया है। यह स्मार्ट इनोवेशन विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के 16,000 फीट की ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सैनिकों तक जरूरी सामान तेजी से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
मोनो रेल सिस्टम की खासियत
कामेंग हिमालय क्षेत्र में यह नया सिस्टम सेना को रसद और जरूरी उपकरण पहुंचाने में मदद करेगा। इन क्षेत्रों में न तो सड़क है और न ही कोई अन्य वाहन पहुंच सकता है। संकरे रास्ते, ढीली चट्टानें, अप्रत्याशित मौसम और सीमित ऑक्सीजन के कारण छोटे से छोटे सामान को भी सैनिकों को अपनी पीठ पर ढोना पड़ता था।
इस मोनो रेल के आने से समय, मेहनत और जोखिम दोनों कम हो जाएंगे। सैनिक अब भारी सामान को आसानी से और सुरक्षित तरीके से दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचा सकेंगे।
गजराज कॉर्प्स की भूमिका
गजराज कॉर्प्स भारतीय सेना की चौथी कॉर्प्स (IV Corps) है और यह ईस्टर्न कमांड का हिस्सा है। इसकी स्थापना 4 अक्टूबर 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय हुई थी। गजराज पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन और सीमा प्रबंधन में सक्रिय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
कॉर्प्स के तहत शामिल हैं:
- 71 माउंटेन डिवीजन
- 5 बॉल ऑफ फायर डिवीजन
- 21 रियल हॉर्न डिवीजन
1962 के भारत-चीन युद्ध में गजराज कॉर्प्स की सक्रिय भूमिका रही थी। गजराज का अर्थ हाथी होता है, जो शक्ति, स्थिरता और पराक्रम का प्रतीक है। इसका नाम पूर्वोत्तर भारत में हाथियों की प्रमुख उपस्थिति और कॉर्प्स की ताकत को दर्शाने के लिए रखा गया है।








