
- शहीद परिवार की अस्मिता पर प्रशासन का दबाव: एक विधवा की पुकार
- भ्रष्टाचार के खिलाफ शहीद की पत्नी का साहसिक संघर्ष
- जबरन ट्रांसफार्मर लगाने की कोशिश: शहीद की विधवा का कड़ा विरोध
अम्बेडकरनगर। अम्बेडकरनगर के बरियावन बाजार के पास “कजरी का पोखरा” इलाके में एक शहीद फौजी की विधवा पत्नी सिस्टम के खिलाफ अकेले लड़ रही हैं। उनका आरोप है कि विद्युत विभाग और पीडब्ल्यूडी उनके घर के सामने जबरदस्ती हाईटेंशन ट्रांसफॉर्मर लगाने पर आमादा है, जबकि पहले इसे कहीं और लगाने का आश्वासन दिया गया था।
“मेरा बेटा सीमा पर देश की रक्षा करता है, लेकिन घर की चौखट नहीं बचा पा रहा”
आँसू भरी आवाज में शहीद की पत्नी कहती हैं, “मेरा एक बेटा आज भी सेना में देश की सेवा कर रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार की मशीनरी हमारे आँगन में घुस आई है।” उनके दोनों बेटे रोजगार के लिए बाहर रहते हैं, ऐसे में वह अकेले इस अन्याय के खिलाफ डटी हुई हैं।
प्रशासनिक उत्पीड़न का प्रतीक बना ट्रांसफॉर्मर
यह मामला सिर्फ एक ट्रांसफॉर्मर को लेकर नहीं, बल्कि उस मानसिक यातना को उजागर करता है, जो शहीदों के परिवारों को झेलनी पड़ती है। विधवा ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जबरदस्ती की वजह से कोई हादसा हुआ, तो जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
क्या शहीद परिवारों को सम्मान का भी अधिकार नहीं?
उनका सवाल समाज और सरकार के लिए एक चुनौती है—”जिस परिवार ने देश को फौजी दिए, क्या उसकी इज्जत की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं?” उनकी लड़ाई अब सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि तमाम शहीद परिवारों की आवाज बन चुकी है।








