
- 30 जुलाई तक कार्य पूरा करने का समय दिया गया
- 17 जिलों में यमुना के डूब क्षेत्र का सीमांकन होगा
- जिओ कार्डिनेट की बजाय जमीन पर निशान लगाने का निर्देश
आगरा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना नदी के डूब क्षेत्र की पहचान के लिए प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह असगरपुर से प्रयागराज तक 1,056 किलोमीटर लंबाई में हर 200 मीटर पर डूब क्षेत्र को दिखाने वाली मुडि्डयां लगाएं। इस कदम से आम लोगों को डूब क्षेत्र की पहचान करने में आसानी होगी। एनजीटी ने राज्य सरकार को यह कार्य 30 जुलाई तक पूरा करने का समय दिया है।
एनजीटी की सख्ती: हर 200 मीटर पर डूब क्षेत्र के निशान
यमुना के डूब क्षेत्र को लेकर ताजनगरी के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय जल आयोग ने असगरपुर से प्रयागराज तक यमुना का डूब क्षेत्र निर्धारित कर लिया था, जिसमें 100 साल की बाढ़ के आधार पर डूब क्षेत्र के निशान लगाए गए हैं। हालांकि, एनजीटी ने जिओ कार्डिनेट की बजाय जमीन पर निशान लगाने का निर्देश दिया ताकि आम लोग इसे आसानी से समझ सकें।
सख्त निर्देश: 200 मीटर पर मुडि्डयां लगानी होंगी
एनजीटी ने कहा कि डूब क्षेत्र के निशान केवल जिओ कार्डिनेट से काम नहीं चलेगा और इसे जमीन पर डि-मार्क किया जाना चाहिए। इसके लिए यमुना के दोनों किनारों पर हर 200 मीटर की दूरी पर मुडि्डयां लगानी होंगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रतिबंधित क्षेत्रों के नियमों का कड़ाई से पालन किया जा सके।
गौतमबुद्ध नगर से प्रयागराज तक डूब क्षेत्र की सीमांकन
इस कार्य को गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, जालौन, औरैया, कानपुर देहात, हमीरपुर, कानपुर, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी और प्रयागराज जैसे 17 जिलों में किया जाएगा।








