
- राहुल गांधी का आत्ममंथन: “ओबीसी हमसे दूर चला गया
- मुस्लिम परस्त कहे जाने से डरने की जरूरत नहीं: राहुल
- खड़गे का संघ पर हमला: “विचारधारा चुराना आसान नहीं
- नेहरू और पटेल एक ही सिक्के के दो पहलू थे
अहमदाबाद। कांग्रेस के 84वें अधिवेशन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बीजेपी और आरएसएस पर तीखे हमले बोले। कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी ने आत्ममंथन करते हुए कहा कि कांग्रेस दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण समुदायों में उलझी रही, जबकि ओबीसी वर्ग धीरे-धीरे दूर होता गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने संघ पर गांधी और पटेल की विरासत चुराने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी की स्वीकारोक्ति: ओबीसी को हमने खो दिया
राहुल गांधी ने बैठक में कहा, “हमने बार-बार दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण समुदाय की बात की, लेकिन ओबीसी समुदाय को उतनी तवज्जो नहीं दी, जितनी देनी चाहिए थी। नतीजतन, वह हमसे दूर होता गया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को मुस्लिम परस्त कहे जाने से डरना नहीं चाहिए, बल्कि डटकर जनहित के मुद्दे उठाने चाहिए।
खड़गे का आरएसएस पर हमला: ‘विचारधारा चुराना नामुमकिन’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आरएसएस का स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं रहा, फिर भी वह सरदार पटेल की विरासत पर दावा कर रहा है। उन्होंने तंज कसा, “गांधीजी का चश्मा और छड़ी चुरा सकते हैं, लेकिन उनके आदर्शों का पालन नहीं कर सकते।”
उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी में सर्व सेवा संघ, गुजरात विद्यापीठ और अन्य गांधीवादी संस्थानों को संघ अपने एजेंडे के तहत हथिया रहा है।
‘नेहरू-पटेल को आमने-सामने दिखाने की साजिश’
खड़गे ने कहा कि बीजेपी जानबूझकर नेहरू और पटेल को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में पेश करती है। लेकिन इतिहास गवाह है कि दोनों नेताओं के बीच सम्मान और सौहार्द था। 1937 के गुजरात विद्यापीठ के भाषण से लेकर 1949 में पटेल द्वारा नेहरू की प्रशंसा तक, उन्होंने कई ऐतिहासिक उद्धरणों का हवाला दिया।
RSS पर प्रतिबंध लगाने वाले पटेल की विरासत पर दावा क्यों?
खड़गे ने जोर देते हुए कहा, “सरदार पटेल ने खुद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। उनकी सोच संघ की विचारधारा के बिल्कुल उलट थी।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि गांधी, नेहरू और अंबेडकर के पुतलों को जलाने का काम भी संघ ने किया था।
संविधान और संस्थाओं पर बीजेपी सरकार का ‘प्रहार’
खड़गे ने कहा कि संसद परिसर से गांधी-अंबेडकर की मूर्तियां हटाकर उन्हें एक कोने में रख दिया गया। उन्होंने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यसभा में बाबा साहेब का मजाक उड़ाया गया।
‘संविधान की रक्षा में कांग्रेस पूरी ताकत से खड़ी’
CWC बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए खड़गे ने कहा कि पार्टी संविधान और इसके रचनाकारों का सम्मान करती है और उनकी विरासत की रक्षा करती रहेगी। उन्होंने कहा, “सरदार पटेल हमारे विचारों और संघर्षों का हिस्सा हैं। हम उनकी सोच को आगे ले जाएंगे।”
64 साल बाद गुजरात में कांग्रेस का बड़ा आयोजन
गुजरात में 1961 के बाद यह कांग्रेस का पहला अधिवेशन है। राहुल गांधी और सोनिया गांधी अहमदाबाद पहुंच चुके हैं। प्रियंका गांधी फिलहाल अनुपस्थित हैं। बैठक में शामिल होने के लिए देशभर से 80 वरिष्ठ नेता चार्टर्ड फ्लाइट्स से आए हैं।
9 अप्रैल को रिवरफ्रंट पर मुख्य अधिवेशन
साबरमती रिवरफ्रंट पर 9 अप्रैल को मुख्य अधिवेशन आयोजित होगा, जिसमें 1700 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। “न्यायपथ: संकल्प, समर्पण, और संघर्ष” थीम के तहत यह अधिवेशन कांग्रेस की रणनीतिक दिशा तय करेगा। यह आयोजन गुजरात में संगठन को मजबूत करने और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








