
नई दिल्ली। केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाने के लिए इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पारित कराने की तैयारी है। हालांकि, विधेयकों को मंजूरी दिलाने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जरूरी समर्थन जुटाना होगा।
पहले प्रयास में नहीं मिला था दो-तिहाई बहुमत
इससे पहले 16 और 17 अप्रैल को हुई कोशिश में सरकार लोकसभा में विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी थी। अब सरकार की ओर से संख्या बल मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि विशेष सत्र बुलाने की सूचना करीब एक सप्ताह पहले दी जा सकती है।
लोकसभा में 360 वोटों की जरूरत
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें तीन सीटें खाली बताई गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए के पास 318 सांसद हैं, जबकि विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत के रूप में 360 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार को अतिरिक्त सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा।
राज्यसभा में भी समर्थन जुटाने की चुनौती
राज्यसभा में भी सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन की दरकार होगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एनडीए के पास 153 सांसद हैं, जबकि विधेयक के लिए 162 वोटों की जरूरत बताई गई है। इस स्थिति में सरकार को छोटे दलों और अन्य विपक्षी सांसदों का समर्थन जुटाना होगा।
डीएमके समेत छोटे दलों से बातचीत की चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार डीएमके सहित कुछ दलों से समर्थन हासिल करने के लिए बातचीत कर रही है। तमिलनाडु चुनाव के बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ने तथा विपक्षी गठबंधन में बदलाव की खबरों के बीच सरकार समर्थन का समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, विभिन्न दलों के रुख और विधेयकों पर उनके अंतिम फैसले के आधार पर ही सरकार की रणनीति की सफलता तय होगी।
मानसून सत्र के बाद अब तक नहीं हुआ सत्रावसान
संसद के मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके बाद भी दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों पर अब सबकी नजरें सरकार की अगली घोषणा और संसद में दलों के समर्थन पर टिकी हैं।महिला आरक्षण









