संदेश: भारत को भारत ही रहने दो, इसे किसी और की छाया में न लाओ

  • जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाराणसी पहुंचे
  • मठ में लक्ष्मी-गणेश की पूजा
  • भारत की आत्मा संस्कृति और आस्था में बसती है, गौ माता की रक्षा जरूरी

वाराणसी। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे और मठ में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति, आस्था और स्वदेशी मूल्य पर अपने विचार रखे।

धर्म और राजनीति पर संदेश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति और आस्था में बसती है। सत्ता कौन संभाले यह राजनीति का विषय हो सकता है, लेकिन गौ माता की रक्षा और सनातन मूल्यों की स्थापना सभी का कर्तव्य है।

धार्मिक प्रतीकों का सम्मान जरूरी
उन्होंने चेताया कि भगवान महादेव को ‘I Love’ कहकर संबोधित करना उनकी गरिमा का अपमान है। भगवान आराधना का विषय हैं, आकर्षण की वस्तु नहीं। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई हो।

स्वदेशी अपनाने की अपील
स्वामी ने कहा कि विदेशी सोच अभी भी हमारे नेतृत्व पर हावी है। प्रधानमंत्री के काशी विकास मॉडल में क्योटो का संदर्भ इसका उदाहरण है। उन्होंने नेताओं और आम जनता से आग्रह किया कि हर भारतीय स्वदेशी अपनाए और अपनी संस्कृति पर गर्व करे।

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