- सांसद वीरेंद्र सिंह ने वाराणसी में दिशा कमेटी की बैठक न होने पर उठाए सवाल
- सरकारी योजनाओं की समीक्षा में देरी पर सांसद की नाराजगी
- चंदौली सांसद का आरोप: वाराणसी में दिशा कमेटी की बैठकें नहीं हो रहीं
वाराणसी। वाराणसी में केंद्र सरकार की योजनाओं पर निगरानी रखने वाली दिशा कमेटी की बैठक महीनों से नहीं हो सकी है। इस मुद्दे को लेकर चंदौली के सांसद ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही चिंताजनक है। उनका कहना है कि पिछले आठ से नौ महीनों से लगातार प्रयासों के बावजूद एक भी बैठक आयोजित नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि दिशा कमेटी ऐसी संस्था है जिसके ज़रिए केंद्र की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि अधिकारी जनहित में कार्य कर रहे हैं या नहीं। विशेष रूप से मनरेगा के तहत मज़दूरों को समय पर भुगतान हो रहा है या नहीं, यह देखा जाता है।
सांसद ने स्वास्थ्य सेवाओं और प्रधानमंत्री द्वारा गोद लिए गए गांवों की हालत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या इन गांवों में वास्तव में कोई सुधार हुआ है? यदि नहीं, तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है?
सांसद ने दावा किया कि इस संबंध में कई बार प्रधानमंत्री कार्यालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, मंडल आयुक्त और ज़िलाधिकारी को पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर से ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने सवाल किया कि क्या वाराणसी के नागरिकों को सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जानकारी पाने का अधिकार नहीं है? क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान उन्हें ग्रामीणों से कई ज़रूरी मुद्दों की शिकायतें मिलती हैं, जिनका तत्काल समाधान आवश्यक होता है।
शराब नीति पर भी साधा निशाना
इसके अलावा, सांसद ने प्रदेश सरकार की शराब नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गरीब और वंचित समुदायों की बस्तियों में शराब ठेके खोलकर समाज को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन ठेकों का संचालन भाजपा से जुड़े लोग कर रहे हैं और इसके पीछे बड़े शराब माफियाओं का हाथ है।
सांसद ने चेतावनी दी कि वह जल्द ही इस मामले को लेकर चुनाव आयोग से मिलेंगे और शराब के ज़रिए वोट बैंक प्रभावित करने की कथित साज़िश की जांच की मांग करेंगे।








