अम्बेडकरनगर। जनपद में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रशासन ने नई रणनीति पर काम शुरू किया है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सड़क सुरक्षा को डेटा और तकनीक आधारित प्रणाली से मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में IIT मद्रास के रोड सेफ्टी (CoERS) के प्रोफेसर बैंकटेश बालासुब्रमण्यम, पंकज मेहरा और हेमेन्द्र शर्मा ने तकनीकी सत्र लिया। प्रशिक्षण में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और NHAI के सहयोग से तैयार मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई।
‘संजया एप्लिकेशन’ से होगी हर दुर्घटना की डिजिटल ट्रैकिंग
विशेषज्ञों ने ‘संजया एप्लिकेशन’ के उपयोग की प्रक्रिया समझाई। इसके जरिए सड़क दुर्घटनाओं का रियल टाइम डेटा फीड किया जाएगा और उसका विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट की पहचान की जाएगी।
डेटा ड्रिवन हाइपरलोकल इंटरवेंशन (DDHI) मॉडल के तहत हर दुर्घटना स्थल का माइक्रो लेवल पर अध्ययन कर सुधारात्मक कदम तय किए जाएंगे। फील्ड परसेप्शन सर्वे (FPS) के जरिए जमीनी स्थिति का आकलन भी किया जाएगा।
ब्लैक स्पॉट और ट्रॉमा सिस्टम पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण में जिले के ब्लैक स्पॉट, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ट्रॉमा केयर व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर पहचान और त्वरित कार्रवाई से बड़ी संख्या में जान बचाई जा सकती है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को दुर्घटना डेटा फीडिंग और रिस्पॉन्स सिस्टम में विशेष भूमिका दी गई है।
सभी विभागों को एक साथ काम करने के निर्देश
बैठक में पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगर निकाय, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और NHAI को संयुक्त रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
आगामी सप्ताह में पुलिस विभाग को चिन्हित ब्लैक स्पॉट और संभावित दुर्घटना क्षेत्रों का सर्वे पूरा कर डेटा अपडेट करने का लक्ष्य दिया गया है।









