नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सोमवार को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने संसद की संयुक्त समिति के सामने ‘एक देश, एक चुनाव’ की पहल को “राक्षसी” और “असंवैधानिक” बताया।
चिदंबरम ने कहा कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के तैयार किया गया है।
संयुक्त समिति के सामने रखी अपनी राय
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व गृह और वित्त मंत्री ने संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपनी आपत्तियां रखीं।
उन्होंने प्रस्ताव के संवैधानिक और लोकतांत्रिक पहलुओं पर सवाल उठाते हुए इसे लागू किए जाने का विरोध किया।
‘बिना सोचे-समझे किया गया काम’
चिदंबरम ने एक देश, एक चुनाव के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के प्रस्ताव को “बिना सोचे-समझे” किया गया काम बताया।
उनका कहना है कि चुनावों को एक साथ कराने की व्यवस्था को लेकर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर विचार किया जाना जरूरी है।









