पेपर लीक पर केंद्र का नया कानून

2 महीने में जांच और 3 महीने में ट्रायल का प्रावधान

  • लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश होने की संभावना
  • पेपर लीक मामलों के लिए बनेगी स्पेशल टास्क फोर्स
  • 2 महीने में जांच और 3 महीने में ट्रायल अनिवार्य

नई दिल्ली। केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन के बाद सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश कर सकते हैं।

स्पेशल टास्क फोर्स का होगा गठन

प्रस्तावित संशोधन में नई धारा 12ए और 12बी जोड़ी गई हैं। इनके तहत केंद्र सरकार पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन कर सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) को भी सौंपी जा सकेगी।

2 महीने में जांच पूरी करना होगा अनिवार्य

नए प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा मामला सौंपे जाने के बाद जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी रोजाना सुनवाई

संशोधन बिल में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर विशेष अदालतें नामित करेंगे। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा।

अपील के लिए भी तय होगी समय सीमा

बिल में अपील प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम 90 दिन तक बढ़ाई जा सकेगी। हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ इस अपील की सुनवाई करेगी और तीन महीने के भीतर फैसला देने का प्रयास करेगी।

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