
- पुलिस ने अब तक 12 युवतियों को मुक्त कराया
- गैंग को दुबई और कनाडा से फंडिंग मिलने के सबूत
- विदेशी फंडिंग से धर्मांतरण कराने की पुष्टि
आगरा। आगरा में दो सगी बहनों के जबरन धर्मांतरण मामले में पकड़े गए दस आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड मंगलवार को समाप्त हो गई। रिमांड खत्म होने पर पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने छह आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए, जबकि चार आरोपियों की रिमांड अवधि 1 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी गई है।
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, रिमांड बढ़ाए गए चार आरोपी हैं—आयशा उर्फ एसबी कृष्णा, हसन अली उर्फ शेखर राय, रहमान कुरैशी और मोहम्मद अली। इनसे पूछताछ के लिए पुलिस को अभी और समय चाहिए। मुख्य अभियोजन अधिकारी ब्रजमोहन सिंह कुशवाह ने बताया कि शेष छह आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
इस मामले में पुलिस ने देश के छह राज्यों में दबिश देकर दस लोगों को गिरफ्तार किया था। दो सगी बहनों को कोलकाता की मुस्लिम बहुल बस्ती से बरामद किया गया था, जहां वे बुर्का पहने मिलीं। पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार आयशा के जरिए ही दिल्ली के मुस्तफाबाद निवासी अब्दुल रहमान तक पुलिस पहुंची थी। इसके बाद उसके दो बेटों सहित तीन और लोगों को भी गिरफ्तार किया गया, जिन्हें पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
अब तक पुलिस इस गैंग की करतूतों का पर्दाफाश करते हुए एक दर्जन से अधिक युवतियों को जबरन धर्मांतरण से बचा चुकी है। रोहतक और देहरादून की पीड़ित युवतियों ने गैंग के खिलाफ अपने बयान भी कोर्ट में दर्ज कराए हैं।








