
- कोर्ट ने पूछा – अब 2025 में 1995 के कानून को क्यों चुनौती दी गई
- याचिका में वक्फ एक्ट को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया गया
- याचिकाकर्ता ने आर्टिकल 14 और 15 के उल्लंघन का आरोप लगाया
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ एक्ट, 1995 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता से भी सवाल पूछा कि आखिर इतने साल बाद अब इस कानून को चुनौती क्यों दी जा रही है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की गैरमौजूदगी में यह सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने की।
याचिका में वक्फ एक्ट के कई प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता निखिल उपाध्याय की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि वक्फ कानून केवल मुस्लिम समुदाय के लिए है, जबकि अन्य धर्मों की संपत्तियों को लेकर ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इससे संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन होता है।
याचिकाकर्ता ने 2013 के संशोधन पर भी उठाए सवाल
कोर्ट को बताया गया कि याचिका में 2013 में किए गए वक्फ एक्ट के संशोधन को भी चुनौती दी गई है। इस पर बेंच ने कहा कि यह भी 12 साल पुराना मामला है। याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991’ पर भी वर्षों बाद सुनवाई कर रहा है।
याचिका हुई अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को पहले से लंबित एक अन्य याचिका – जो वक्फ एक्ट 1995 को चुनौती देती है – के साथ जोड़ दिया। यह याचिका लॉ स्टूडेंट निखिल उपाध्याय, पारूल खेडा और अधिवक्ता हरिशंकर जैन द्वारा दायर की गई थी।









